Saturday , December 16 2017

तलाक़ मुक़द्दमा को ख़ातून के आबाई वतन मुंतक़िल ना करने हाइकोर्ट का हुक्म कुलअदम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैके एक बीवी की मालीयाती ख़ुशहाली और आज़ादी इस बात का जवाज़ नहीं होसकती हैके उसे शौहर की तरफ से दाख़िल करदा तलाक़ मुक़द्दमा को मुंतक़िल करने के लिए उसकी दरख़ास्त मुस्तर्द करदी जाये।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैके एक बीवी की मालीयाती ख़ुशहाली और आज़ादी इस बात का जवाज़ नहीं होसकती हैके उसे शौहर की तरफ से दाख़िल करदा तलाक़ मुक़द्दमा को मुंतक़िल करने के लिए उसकी दरख़ास्त मुस्तर्द करदी जाये।

जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की ज़ेर-ए-क़ियादत बंच ने एहसास ज़ाहिर किया कि आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट के इस हुक्म को कुलअदम क़रार दिया जिस ने मुक़द्दमा ख़ातून के आबाई वतन काकिनाडा के फ़ैमिली कोर्ट मुंतक़िल करने की दरख़ास्त को मुस्तर्द कर दिया था।

हाइकोर्ट ने अपने हुक्मनामा में कहा था कि चूँकि ख़ातून एक ख़ानगी कंपनी में काम करती है उसे अपने वलिदेन के रहम-ओ-करम पर रहना नहीं है लिहाज़ा वो अपने वालिदेन के घर में रहने का बहाना बनाकर केस अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ मुंतक़िल करने की दरख़ास्त नहीं करसकती।

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