Wednesday , June 20 2018

तलाक पर काजी का प्रमाणपत्र केवल राय है और इसकी कानूनी वैधता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तलाक मामले पर एक अहम  फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाक पर काजी की तरफ से जारी किया गया प्रमाणपत्र केवल राय है और इसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। चीफ जस्टिस एस.के. कौल और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की पीठ ने वकील और पूर्व विधायक बदर सैयद की जनहित याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए यह फैसला सुनाया।

पूर्व विधायक बदर सैयद ने याचिका में काजी की तरफ से जारी घोषणा की निंदा की। उन्होंने अपनी याचिका में काजी को प्रमाणपत्र देने और अन्य दस्तावेजों को प्रमाणित करने या मंजूरी देने से रोकने की मांग की है। कोर्ट ने काजी एक्ट, 1880 की धारा 4 का उल्लेख करते हुए कहा कि काजी का पद व्यक्ति को न्यायिक या प्रशासनिक अधिकार नहीं देता है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शरई डिफेंस फोरम का कहना था कि काजी द्वारा जारी प्रमाणपत्र केवल शरई कानून का विशेषज्ञ होने की राय होती है। इसके समर्थन में उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरई) एप्लिकेशन एक्ट, 1937 की धारा-2 का हवाला दिया। सैयद और वीमेन लॉयर्स एसोसिएशन समेत उन्हें समर्थन देने वालों ने कहा कि काजी के प्रमाणपत्र से शादी संबंधी कार्यवाहियों और पति-पत्नी की आपसी समझ में भ्रम पैदा करता है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार से कहा कि इस आदेश को स्पष्टता के लिए न्यायिक फोरम के पास भेजें। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी तय की है।

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