Wednesday , December 13 2017

तशकीले तेलंगाना के आख़िरी मरहले में सियासी धोखा

ऐसे वक़्त जबकि रियासत की तक़सीम का अमल आख़िरी मरहले में दाख़िल होचुका है और मर्कज़ी हुकूमत 5 दिसमबर से शुरू होने वाले पार्लियामेंट के मीटिंग में तेलंगाना बिल पेश करने की तैयारीयों में है, ग्रुप आफ़ मिनिस्टर्स ने अपनी बाअज़ तजावीज़ के ज़र

ऐसे वक़्त जबकि रियासत की तक़सीम का अमल आख़िरी मरहले में दाख़िल होचुका है और मर्कज़ी हुकूमत 5 दिसमबर से शुरू होने वाले पार्लियामेंट के मीटिंग में तेलंगाना बिल पेश करने की तैयारीयों में है, ग्रुप आफ़ मिनिस्टर्स ने अपनी बाअज़ तजावीज़ के ज़रीये तेलंगाना के कांग्रेस क़ाइदीन को मायूस कर दिया है।

तेलंगाना के कांग्रेस क़ाइदीन और तेलंगाना तंज़ीमें इस बात को लेकर ख़ुशीयां मना रहे थे कि दस अज़ला पर मुश्तमिल तेलंगाना रियासत सोनिया गांधी की सालगिरह के मौके पर तशकील पा जाये गी।

लेकिन ग्रुप आफ़ मिनिस्टर्स ने रॉयल तेलंगाना की तजवीज़ मंज़रे आम पर लाते हुए सियासी मंज़र यकायक तबदील कर दिया है। ग्रुप आफ़ मिनिस्टर्स में शामिल मर्कज़ी वज़ीर जय् राम रमेश ने तेलंगाना के कांग्रेस क़ाइदीन से रब्त पैदा करते हुए रॉयल तेलंगाना के हक़ में ताईद हासिल करने की कोशिश की है।

डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर दामोदर राज नरसिम्हा ने जय राम रमेश से मुलाक़ात के बाद इस बात का एतेराफ़ किया कि करनूल और अनंतपुर अज़ला को तेलंगाना में शामिल करते हुए रॉयल तेलंगाना के क़ियाम से मुताल्लिक़ तजवीज़ मर्कज़ के ज़ेर-ए-ग़ौर है।

मर्कज़ की तरफ से अचानक मौक़िफ़ में तबदीली से कांग्रेस के क़ाइदीन में मायूसी पाई जाती है। वो हाईकमान से नुमाइंदगी कररहे हैं कि रॉयल तेलंगाना के बजाय कांग्रेस वर्किंग कमेटी की क़रारदाद के मुताबिक़ दस अज़ला पर मुश्तमिल रियासत तशकील दी जाये।

बावसूक़ ज़राए ने बताया कि जयराम रमेश के अलावा कमेटी के अरकान ए के अनटोनी और सुशील कुमार शिंदे ने भी कांग्रेस के तेलंगाना क़ाइदीन से इस सिलसिले में मुशावरत की है।

इन वुज़रा का कहना है कि रॉयल तेलंगाना की तशकील की सूरत में तेलंगाना भी सियासी सीमांध्र की तरह एक मज़बूत रियासत होगी और दोनों रियास्तों में लोक सभा और असेंबली की नशिस्तें बराबर होजाएंगी।

तेलंगाना में फ़िलवक़्त लोक सभा की 15 और असेंबली की 119 नशिस्तें हैं। बताया जाता है कि तेलंगाना कांग्रेस क़ाइदीन रॉयल तेलंगाना की तजवीज़ पर कुछ कहने से गुरेज़ कररहे हैं।

इब्तिदा में कांग्रेस क़ाइदीन ने हैदराबाद के बारे में बाअज़ शराइत से उसूली तौर पर इत्तिफ़ाक़ करलिया था जिन में दस बरसों के लिए ला ऐंड आर्डर और रेवेंयू जैसे उमूर् की मर्कज़ के तहत अंजाम दही और सियासी
सीमांध्र से ताल्लुक़ रखने वालों को अलॉट करदा ज़मीनात को मंसूख़ ना किए जाने से मुताल्लिक़ क़ानूनसाज़ी शामिल है। लेकिन अब हाईकमान ने रॉयल तेलंगाना की तजवीज़ पेश करते हुए कांग्रेस क़ाइदीन की मुश्किलात में इज़ाफ़ा कर दिया है।

बावसूक़ ज़राए ने बताया कि ग्रुप आफ़ मिनिस्टर्स ने ताहाल हैदराबाद के बारे में कोई मौक़िफ़ इख़तियार नहीं किया है और उसे मर्कज़ी काबीना की सवाबदीद पर छोड़ दिया गया।

कांग्रेस क़ाइदीन को अंदेशा है कि रॉयल तेलंगाना की तजवीज़ को टी आर एस कुबूल नहीं करेगी जो कि मसला तेलंगाना की अहम फ़रीक़ है। रॉयल तेलंगाना की तशकील में सब से बड़ी रुकावट बी जे पी भी बन सकती है क्यूंकि बी जे पी ने वाज़िह कर दिया है कि 10 अज़ला पर मुश्तमिल तेलंगाना रियासत के अलावा किसी और तजवीज़ की सूरत में वो पार्लियामेंट में बिल की ताईद नहीं करेगी।

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