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……ताज ही नहीं लालकिला भी फरोख्त कर डाला

नई दिल्ली: मिथलेश कुमार श्रीवास्तव यह उस ठग का नाम हैं जिसने ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को बेच डाला। इसे लोग नटवरलाल के नाम से भी जाना करते थे। मिथलेश बिहार का रहने वाला था और उसकी पैदाइश 1912 में सीवान जिले के बंगरा ग

नई दिल्ली: मिथलेश कुमार श्रीवास्तव यह उस ठग का नाम हैं जिसने ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को बेच डाला। इसे लोग नटवरलाल के नाम से भी जाना करते थे। मिथलेश बिहार का रहने वाला था और उसकी पैदाइश 1912 में सीवान जिले के बंगरा गांव में हुआ था।

इस ठग को मुल्क भर के सभी चीटर अपना आइडियल मानते हैं। नटवरलाल अपनी जिंदगी में कई लोगो को चुना लगा चुका हैं। इसने भोले-भाले लोगों से करोडों रूपए ठगे हैं। मिथलेश के जाल में बडे बडे सरमायाकार भी फंस चुके हैं।

मिथलेश के 50 से ज़्यादा फर्जी नाम थे और वह हमेशा अपने नाम बदलता रहता था। उसे जाली दस्तखत करने में महारत हासिल थी जिसके दमपर वह लोगों को चुना लगाता था। इस ठग पर 100 से ज़्यादा केस दर्ज थे और इसे 8 रियासतों की पुलिस ढूंढ रही थी। वह कई मरतबा पकडा भी गया और उसे 113 साल की सजा भी हुई लेकिन अफसोस वह हमेशा ही पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार यानी चंपत हो जाता था। वह आखिरी मरतबा 84 साल की उम्र में साल 1996 में भागा था।

मिथलेश कुमार श्रीवास्तव की मौत पुरअसरार रही हैं। उसके वकील ने साल 2009 में अदालत में एक अर्जी दायर की जिसमे उनके खिलाफ ज़ेर ए गौर 100 से ज़्यादा मामलों को रद्द कर दिया जाए क्योंकि 25 जुलाई 2009 को उनकी मौत हो गई है लेकिन उसके भाई का कहना हैं की उसकी मौत तो 1996 में ही हो गई थी और उसका आखिरी रसूमात रांची में किया गया था।

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