Friday , September 21 2018

तारीख़ी उस्मानिया यूनीवर्सिटी के संगे बुनियाद को तबाह करने की साज़िश

आसिफ़ साबह हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर को कई लिहाज़ से हिंदुस्तान की साबिक़ देसी रियासतों के हुक्मरानों पर फ़ौक़ियत हासिल है। दुनिया के सब से दौलतमंद तरीन शख़्स होने के बावजूद दीगर हुक्मरानों की बनिसबत उन की ज़िंदगी मे

आसिफ़ साबह हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर को कई लिहाज़ से हिंदुस्तान की साबिक़ देसी रियासतों के हुक्मरानों पर फ़ौक़ियत हासिल है। दुनिया के सब से दौलतमंद तरीन शख़्स होने के बावजूद दीगर हुक्मरानों की बनिसबत उन की ज़िंदगी में बहुत सादगी का पाया जाता था लेकिन उन की खूबियों में सब से अहम ये थी कि वो पत्थरों में पाए जाने वाले हीरों को बाआसानी तलाश कर लेते थे उन की मर्दुम शनासी का हाल ये था कि ममलकत हैदराबाद दक्कन में हिंदुस्तान के तमाम बासलाहियत शख्सियतें जमा हो गई थीं उन में जै़द उल्मा, माहिरीने तालीम, अपने फ़न में माहिर उत्बा, साईंसदाँ, माहिरीन, उलूम फ़लकियात, आराज़ीयात, अदीबों, शोअरा और मुसन्निफ़ीन की एक कसीर तादाद शामिल हैं।

हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर ने दीगर हिंदुस्तानी देसी रियासतों के हुक्मरानों की बनिसबत दक्कन में शोबे तालीम और तहक़ीक़ और ज़िंदगी के तमाम शोबों को असरी ज़रूरियात से हमआहंग करने का बीड़ा उठाया। और उन के इल्मी ज़ौक़ की सब से बड़ी मिसाल जामिआ उस्मानिया है इस यूनीवर्सिटी को दुनिया की सब से पहली उर्दू यूनीवर्सिटी होने का एज़ाज़ हासिल है।

जहां सुकूत हैदराबाद से क़ब्ल और बाद में कुछ बरसों तक आर्ट्स और साईंस, क़ानून, इंजीनीयरिंग और टेक्नोलॉजी, इक़्तिसादीयात और समाजियात, फ़लकियात और दीगर मज़ामीन सिर्फ़ और सिर्फ़ उर्दू में पढ़ाए जाते थे हद तो ये है कि 1968 तक इस यूनीवर्सिटी में क़ानून की तालीम उर्दू में ही हुआ करती थी वैसे तो उस्मानिया यूनीवर्सिटी 1918 में लाखों रुपये के मसारिफ़ से तामीर की गई। लेकिन 1938 में आर्ट्स कॉलेज के इफ़्तिताह के साथ ही सारे बर्रे सग़ीर में एक नए तालीमी बाब का आग़ाज़ हुआ।

आर्ट्स कॉलेज की इमारत को उस्मानिया यूनीवर्सिटी की शान इस का वक़ार कहा जाता है। सर अकबर हैदरी के मश्वरा पर आर्ट्स कॉलेज की इमारत को हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ान बहादुर ने 22 लाख रुपये के मसारिफ़ से तामीर करवाया था तक़रीबन 80 साल क़दीम आर्ट्स कॉलेज उस्मानिया यूनीवर्सिटी की इमारत बिला शुबा फ़न तामीर का शाहकार है।

काश ये लोग उस्मानिया यूनीवर्सिटी आर्ट्स कॉलेज पहुंच कर संगे बुनियाद को साफ़ करते वहां से कूड़ा क्रकट की निकासी को यक़ीनी बनाते तो कितना अच्छा होता वैसे भी यूनीवर्सिटी हुक्काम को भी इस जानिब तवज्जा देने की ज़रूरत है।

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