तालिबान में क़ियादत पर इख़्तिलाफ़ात और काबुल हुकूमत का इंतिबाह

तालिबान में क़ियादत पर इख़्तिलाफ़ात और काबुल हुकूमत का इंतिबाह
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अफ़्ग़ान हुकूमत ने ख़बरदार किया है कि तालिबान के मुनक़सिम गिरोहों से मुज़ाकरात नहीं किए जाएंगे। मुला उमर के बाद अफ़्ग़ान तालिबान में नई क़ियादत के बारे में इख़्तिलाफ़ात के बाइस ये ऐलान किया गया है।

जर्मन ख़बररसां इदारे डी पी ए ने तीन जुलाई बरोज़ पीर बताया कि काबुल हुकूमत ने तालिबान के मुनक़सिम धड़ों से मुज़ाकरात को ख़ारिज अज़ इमकान क़रार दे दिया है।

अफ़्ग़ान सदर अशर्फ़ ग़नी के दफ़्तर से जारी कर्दा एक बयान में कहा गया है कि इंतेज़ामीया हुकूमत मुख़ालिफ़ मुसल्लह जंगजूओं के साथ मुज़ाकरात उसी सूरत में करेगी अगर वो अपने गिरोह के लिए वही नाम इस्तेमाल करेंगे, जो मुल्ला उमर की मौत से क़ब्ल किया जा रहा था।

ये अमर अहम है कि अफ़्ग़ान हुकूमत और तालिबान के साथ मुज़ाकरात का दूसरा दौर जुमा 31 जुलाई को होना तय पाया था लेकिन मुल्ला उमर की हलाकत की ख़बरों के बाद इस अमल को मोख़र कर दिया गया था।

इस गिरोह ने अपने रहनुमा मुल्ला उमर की मौत की तसदीक़ करते हुए मुल्ला अख़्तर मंसूर को नया सरब्राह मुक़र्रर किया था लेकिन मुल्ला उमर के बेटे याक़ूब उमर ने इस फ़ैसले को तस्लीम करने से इनकार कर दिया है।

यूं बज़ाहिर मालूम होता है कि अफ़्ग़ानिस्तान में गुज़िश्ता 14 सालों से फ़आल इन तालिबान बाग़ीयों में क़ियादत के मुआमले पर इख़्तिलाफ़ात पैदा हो चुके हैं।

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