तालिबान से मुज़ाकरात पर बातचीत, करज़ई क़तर में

तालिबान से मुज़ाकरात पर बातचीत, करज़ई क़तर में
दोहा, 31 मार्च: ( एजेंसीज़) अफ़्ग़ानिस्तान के सदर हामिद करज़ई कतरी हुक्काम से बातचीत के लिए दो रोज़ा सरकारी दौरे पर दोहा पहुंच गए हैं।हुक्काम का कहना है कि इस दौरे के दौरान क़तर में तालिबान का सयासी दफ़्तर खोलने पर भी बातचीत मुतवक़्क़े ह

दोहा, 31 मार्च: ( एजेंसीज़) अफ़्ग़ानिस्तान के सदर हामिद करज़ई कतरी हुक्काम से बातचीत के लिए दो रोज़ा सरकारी दौरे पर दोहा पहुंच गए हैं।हुक्काम का कहना है कि इस दौरे के दौरान क़तर में तालिबान का सयासी दफ़्तर खोलने पर भी बातचीत मुतवक़्क़े है।

क़तर में तालिबान के सयासी दफ़्तर खोलने को अफ़्ग़ान हुकूमत और तालिबान के दरमियान बातचीत की सिम्त तै करने के सिलसिले में अहम क़दम माना जाता है। सदर करज़ई के दफ़्तर का कहना है कि क़तर में बातचीत का मौज़ू दो तरफ़ा तआवुन और अफ़्ग़ानिस्तान में क़याम-ए-अमन का अमल होगा।

क़तर में तालिबान का दफ़्तर खुलने की ख़बरें भी काफ़ी अर्से से गर्दिश में हैं। तालिबान के एक दर्जन के क़रीब सयासी मेम्बरान गुज़श्ता एक साल से क़तर में अपने अहले ख़ाना के साथ रिहायश पज़ीर हैं लेकिन अफ़्ग़ान तालिबान ने अभी तक अपने दफ़्तर के बाक़ायदा आग़ाज़ की तसदीक़ नहीं की है।

अमेरीका ने अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान को एतिमाद में लिए बगै़र तालिबान से मुज़ाकरात का पहला दौर मार्च 2012 में दोहा में ही मुनाक़िद किया था जो नाकाम रहा था। 2014 में अफ़्ग़ानिस्तान से अमेरीकी इन्ख़िला की डेडलाइन जैसे जैसे क़रीब आ रही है अफ़्ग़ान बोहरान के हल की कोशिशों में तेज़ी देखी जा सकती है।गुज़श्ता साल दिसंबर में फ़्रांस के दार-उल-हकूमत पेरिस में 12 साल में पहली बार अफ़्ग़ान हुक्काम और तालिबान समेत अफ़्ग़ानिस्तान में सरगर्म मुख़्तलिफ़ दलो के दरमियान ग़ैर रस्मी बातचीत हुई थी जिस का एक नकाती एजंडा अफ़्ग़ानिस्तान में जंग का ख़ातमा था।

ताहम अफ़्ग़ान तालिबान मुज़ाकरात के हवाले से अमेरीकी हुकूमत को अपना असल फ़रीक़ मानते हैं और उनका शुरू से मौक़िफ़ रहा है कि अमेरीकी हुक्काम से मुज़ाकरात के बाद ही अफ़्ग़ान हुक्काम से बातचीत हो सकती है।दरि असना अफ़्ग़ानिस्तान के सदारती तर्जुमान ने पाकिस्तानी तालिबान की अफ़्ग़ानिस्तान में महफ़ूज़ पनाह गाहों के इल्ज़ामात की सख़्ती से तरदीद करते हुए कहा कि ईस्लामाबाद के पास अगर शवाहिद मौजूद हैं तो वो उन्हें बैन-उल-अक़वामी बिरादरी के सामने पेश करें ।

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