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तालीमी इदारों पर मग़रिबी तहज़ीब मुसल्लत करने की कोशिश

खम्मम ०६ मार्च (फ़याकस) मर्कज़ी हुकूमत मग़रिबी तहज़ीब को तालीमी इदारों पर मुसल्लतकरने की कोशिश में है हिंदूस्तान का मुस्लमान मलिक के क़ानून का एहतिराम करता ही, लेकिन हुकूमत कोई ऐसा क़ानून नाफ़िज़ करे क़ुरआन-ओ-हदीस से टकराता हो म

खम्मम ०६ मार्च (फ़याकस) मर्कज़ी हुकूमत मग़रिबी तहज़ीब को तालीमी इदारों पर मुसल्लतकरने की कोशिश में है हिंदूस्तान का मुस्लमान मलिक के क़ानून का एहतिराम करता ही, लेकिन हुकूमत कोई ऐसा क़ानून नाफ़िज़ करे क़ुरआन-ओ-हदीस से टकराता हो मुस्लमान उसे कभी बर्दाश्त नहीं करता।

क़ानून हक़ लाज़िमी तालीम से दीनी मदारिस को मुस्तसना रखा जाई। हमजिंस ताल्लुक़ात अमरीका का मुसल्लत करदा क़ानून है जिस की मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड सख़्त मुज़म्मत करती है इन ख़्यालात का इज़हार खम्मम के भकता रामदास कल्ला कशीतरम मैं मुनाक़िदा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की आईनी हुक़ूक़ बचाओ तहरीक के जल्सा-ए-आम से मौलाना अबदुर्रहीम क़ुरैशी मौलाना तक़ी रज़ाआब्दी, मौलाना हुसाम उद्दीन सानी (जाफ़र पाशाह ) मौलाना मतीन उद्दीन कादरी ने किया। सदर तामीर मिल्लत-ओ-स्टेट जनरल सैक्रेटरी मुस्लिम परनसल ला बोर्ड जनाब अबदुर्रहीमक़ुरैशी ने मुख़ातब करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड शरीयत में मुदाख़िलत को बर्दाश्त नहीं करेगा उन्हों ने कहा कि मुल्की सतह पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की जानिब से आईनी हुक़ूक़ बचाओ तहरीक के जो जलसा मुनाक़िद किए जा रहे हैं जिसमक़सद हुकूमत की जानिब से मुस्लिम पर्सनल ला के अंदर वक्ता फ़ौक़ता जो मुदाख़िलत की जा रही है इस के सद्द-ए-बाब केलिए और मिल्लत में शऊर बेदार करने केलिए ये प्रोग्राम्समुनाक़िद किए जा रहे हैं।

हमारी हुकूमत अमरीका के दबाव में आकर आए दिन नए क़वानीन नाफ़िज़ कररही है जिस की ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड सख़्ती से मुज़म्मत करती ही। उन्हों ने कहा कि क़ानून हक़ लाज़िमी तालीम का बिल जो पार्लीमैंट मेंज़ेर-ए-ग़ौर ही। मर्कज़ी वज़ीर कपिल सिब्बल ने 2000 -ए-से मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के ज़िम्मेदारों को इस बिल में तरमीम करने की तीक़न देते आरहे हैं लेकिन ताव कुतिया इस बल के अंदर कोई तरमीम नहीं की गई। मौलाना अबदुर्रहीम क़ुरैशी ने दो टोक अंदाज़ में कपिल सिब्बल से अपील की है कि फ़िलफ़ौर क़ानून हक़ लाज़ि तालीम बिल में फ़ौरी तरमीम की जाय और दीनी मदारिस को इस बिल से मसतसनी रखा जाई।इस मौक़ा पर आलम दीन मौलाना तक़ी रज़ा आब्दी ने ख़िताब करते हुए कहा कि जो क़ौम बेदार रह कर हालात का मुक़ाबला करती है अल्लाह ताला उस क़ौम की मदद और नुसरत करते हैं और जो क़ौम ख़्वाबॊ एॱ ग़फ़लत में रहती ही। अल्लाह ताला उस क़ौम को ज़वालपज़ीर करते हैं।
आज ज़रूरत इस बात की है कि अमित मुस्लिमा बेदार होकर ज़िंदगी गुज़ारें और हालात का मुक़ाबला करें, मगर अफ़सोस की बात ये है कि आज अमित मुस्लिमा ख़्वाब ग़फ़लत में पड़ी हुई है जिस की वजह से अग़यार मुत्तहिद होकर अमित मुस्लिमा पर टूट पड़ रहे हैं।

और अल्लाह का क़ानून ये है कि जो क़ौम ख़ाब-ए-ग़फ़लत में ज़िंदगी गुज़ारती है अल्लाह ताली उस क़ौम को सफ़ा हती से मिटा देते हैं आज अमित मुस्लिमा के अंदरइत्तिहाद का फ़ुक़दान पाया जाता हैं। ज़रूरत इस बात की है कि आज मुस्लमान अपने सफ़ों में इत्तिहाद को पैदा करें और वही क़ौम कामयाब होसकती है जिस के इंदिरा इत्तिहाद-ओ-इत्तिफ़ाक़ हो। इस मौक़ा पर मौलाना हुसाम उद्दीन सानी जाफ़र पाशाह नाज़िम दार-उल-उलूम हैदराबाद-ओ-रुकन आमिला मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने अपने ख़िताब में कहा कि मुस्लमान अल्लाह-ओ-रसूल ई की इताअत में ज़िंदगी गुज़ारें जैसा कि अल्लाह ताली ने क़ुरआन मजीद के अंदर मुतालिबा किया कि आए ईमान वालो! पूरे के पूरे ईमान में दाख़िल होजावावर शैतान की इत्तिबा ना करो। इस लिए कि शैतान ईमान वालों का खुला हुआ दुश्मन ही। आज ज़रूरत इस बात की है कि अमित मुस्लिमा शरीयत पर मुकम्मल अमल पैरा रही।

मुस्लमान अपने किरदार,अपने अख़लाक़, मुआमलात, तिजारत और दियानतदारी के ज़रीया पहचाना जाता ही, मगर अफ़सोस ये है कि आज ये तमाम चीज़ें हमारे अंदर से ख़तन होते जा रही हैं। आज का ये जलसा इस बात का गवाह है कि मुस्लमान हरगिज़ उस चीज़ को बर्दाश्त नहीं करेगा कि हुकूमत शरीयत के अंदर मुदाख़िलत करे हुकूमत अगर इन चीज़ों से बाज़ ना आई तो फिर हर मोड़ पर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड हुकूमत वक़्त को ललकार यगा और तआक़ुब करेगा, मगर ये जब ही पैदा होगा कि हम इत्तिहाद इत्तिफ़ाक़ के साथ रहते हुए हालात का मुक़ाबला करें। उन्हों ने कहा कि पर्सनल ला बोर्ड मुस्लमानों का वो अज़ीमप्लेटफार्म जिस में तमाम मसलक के मानने वाले उलमाए किराम-ओ-दानिश्वर इन का अहम प्लेटफार्म ही, जिस के ज़रीया से ये पैग़ाम हुकूमतों तक पहुंचाना चाहते हैं कि शरीयत के अंदर मुदाख़िलत की कोशिश की जाय तो मुस्लमान उसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगी। इस मौक़ा पर मौलाना मतीन उद्दीन कादरी नायब मोतमिद उमूमी तामीर मिल्लत हैदराबाद ने अपने ख़िताब में कहा कि हम जिंस ताल्लुक़ात का जो क़ानून हुकूमत लाना चाहती ही, येमग़रिबी तहज़ीब की देन ही। उन्हों ने कहा कि इस से मुस्लमान तो मुस्लमान, अग़यार भी इस क़ानून से नफ़रत करते हैं। ये कैसी हमाक़त है कि मर्द की शादी मर्द से हो?

जिस के ज़रीया ऐच आई वे तेज़ी से फैलता ही, जो लाइलाज मर्ज़ ही। हुकूमत को चाहीए कि इन तमाम बेहूदा क़वानीन से दस्तबरदार होजाई। जलसा की कार्रवाई कन्वीनर जलसा हाफ़िज़ज़की अल्लाह ने चलाई। जलसा का आग़ाज़ हाफ़िज़ अमीर उद्दीन की क़रणत कलाम पाक से हुआ और मौलाना अली असग़र ने नाअत शरीफ़ पेश की। हाफ़िज़ रुशाद उद्दीन सैक्रेटरी जमात-ए-इस्लामी हैदराबाद, मौलाना अरशद अली क़ासिमी सैक्रेटरी मजलिस तहफ़्फ़ुज़ ख़तननबुव्वत आंधरा प्रदेश, जनाब मुहम्मद असअद, माहिर-ए-तालीम-ओ-कन्वीनर मुस्लिम पोराटा हुक़ूक़ समीती खम्मम ने भी ख़िताब किया। मौलाना हिमायत अल्लाह, मौलाना सईद अहमद क़ासिमी, मुफ़्ती अबदाल, मौलाना अबदुलसत्तार, मौलाना अबदुलग़नी, मौलानाइनायत अल्लाह के इलावा अवाम की कसीर तादाद जलसा में शरीक थी।

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