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तालीमी बेदारी का फ़ुक़दान तग़ज़िया की कमी की बुनियादी वजह: सर्वे

नई दिल्ली, १३ जनवरी (एजैंसीज़) हैदराबाद में वाक़्य नंदी फाउंडेशन ने अपने सर्वे में इस बात का इन्किशाफ़ किया है कि हर 5 बच्चे में से एक बच्चा तग़ज़िया की कमी का शिकार है और इस से भी हैरतअंगेज़ बात ये हीका इन बच्चों की उम्र 4 साल से कम है।

नई दिल्ली, १३ जनवरी (एजैंसीज़) हैदराबाद में वाक़्य नंदी फाउंडेशन ने अपने सर्वे में इस बात का इन्किशाफ़ किया है कि हर 5 बच्चे में से एक बच्चा तग़ज़िया की कमी का शिकार है और इस से भी हैरतअंगेज़ बात ये हीका इन बच्चों की उम्र 4 साल से कम है।

हालाँकि आंधरा प्रदेश को इन रियास्तों में शामिल नहीं किया गया है, जिन्हें केस स्टडी के लिए मुंतख़ब किया गया है, लेकिन हक़ीक़त ये है कि आंधरा प्रदेश 43 फ़ीसद आबादी ऐसी है जो तग़ज़िया की कमी का शिकार है। इस सर्वे में मुल़्क की 6 बीमारू रियास्तों पर ज़्यादा तवज्जा दी गई है।

अगर तरक़्क़ी याफ़ता रियास्तों तमिलनाडू, केराला, हिमाचल प्रदेश की बात की जाय तो यहां भी इस तरह के मसाइल मौजूद हैं, जहां कम उम्र् बच्चे तग़ज़िया की कमी का शिकार हैं, लेकिन इन रियास्तों में इन का तनासुब कम है। ये सर्वे अक्टूबर 2010 से 2011 के दौरान 112 अज़ला पर मुश्तमिल है, जिन में से 100 अज़ला ऐसे हैं जहां बच्चों की निगहदाशत और उन के तग़ज़िया पर बहुत कम तवज्जा दी जाती है और बच्चों की नशव-ओ-नुमा पर बहुत कम तवज्जा नहीं दी जाती है।

हिंदूस्तान में साल 2006-ए-से अब तक बच्चों की तग़ज़िया की कमी के मुताल्लिक़ कोई आदाद-ओ-शुमार नहीं की वाज़िह तस्वीर पर मौजूद नहीं है। इस लिए अब इस बात का मंसूबा बनाया जा रहा है कि असल सूरत-ए-हाल का जायज़ा लिया जाए।

ये सर्वे 9 रियास्तों पर मुश्तमिल है, जिन में उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजिस्थान, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, केराला और तमिलनाडू शामिल हैं। गुज़शता मंगल को वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने कहा कि बच्चों के तग़ज़िया की कमी का मसला बाइस-ए-शर्म है। लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि हिंदूस्तान में सदीयों से ये मसला रहा है।

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