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तिब्बी एमरजैंसी ख़िदमात 08 एम्बुलेन्स‌ मैं ख़ातून नर्स की शदीद ज़रूरत

नुमाइंदा ख़ुसूसी

नुमाइंदा ख़ुसूसी
आजकल शहर में मैडीकल एमरजैंसी सरवेस के लिए 108 एम्बुलेन्स‌ ने बड़ी एहमीयत इख्तियार‌ कर ली है । पहले ये सरवेस सत्यम कंप्यूटर्स चलाया करती थी लेकिन अब सत्यम के ज़वाल के बाद जी वे के इंडस्ट्रीज़ ने ये काम जारी रखा है । इस सर्विस पर आने वाले मसारिफ़ का 95 फ़ीसद हिस्सा हुकूमत फ़राहम करती है ।

किसी भी बीमारी के सिलसिले में इस एमरजैंसी एम्बुलेन्स‌ सरवेस को 108 नंबर पर फ़ोन करते ही फ़ोरा जवाब मिलता है और अम्बो लिनस ख़ाह किसी फ़ासिला पर हो अंदरून 15 मिनट और बाअज़ सूरतों में 8 मिनट में काल करने वाले के घर पर पहुंच जाती है और इंतिहाई बरक़र फ़तारी से सरकारी या ख़ानगी हॉस्पिटल पहुंचाती है । ये सर्विस‌ मुफ़्त है । ज़चगी के हवाले से इस की इफ़ादीयत-ओ-एहमीयत ज़्यादा महसूस की जा रही है ।

हामिला ख़वातीन को ज़चगी ख़ाना पहुंचाने और बाअज़ सूरतों में एम्बुलेन्स‌ के अंदर हॉस्पिटल के रास्ता में ही तव्वुलुद के हवाले से इस की ख़िदमात को बहुत सराहा जा रहा है । मगर हाल ही में 108 एम्बुलेन्स‌ के मुलाज़मीन के बारे में एक घनोनी हरकत सामने आई कि 108 एम्बुलेन्स‌के ड्राईवर और टेक्नीशियन‌ अजय और भूपेंद्र एक हामिला ख़ातून को घर से दवाख़ाना ले जा रहे थे कि रास्ता में ही बचा के तव्वुलुद की नौबत आ गई तो विलादत के सख़्त मराहिल के दौरान जब ख़ातून मौत-ओ-हयात की कश्मकश में थी उसे अपना भी होश ना था इन दो मुलाज़मीन में से एक ने डलिवरी की वीडीयो बनाई और MMS के ज़रीया अपने अहबाब-ओ-मुताल्लिक़ीन को इरसाल की ।

जैसे ही पुलिस को इस ग़ैर अख़लाक़ीख़बर की इत्तिला मिली तो उन्हें फ़ोरा गिरफ़्तार कर लिया गया और दोनों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज किया गया । एक तरफ़ 108 एम्बुलेन्स‌ के अंदर तव्वुलुद के बढ़ते वाक़ियात और दूसरी तरफ़ ये ग़ैर अख़लाक़ी वाक़िया इस बात की शिद्दत से ज़रूरत का एहसास दिलाता है कि फ़ौरी तौर पर हर अम्बो लिनस में एक ख़ातून नर्स का इंतिज़ाम होना चाहिए ताकि मरीज़ा को भी इतमीनान हो और दुबारा ऐसा वाक़िया पेश ना आए । लिहाज़ा हुकूमत को चाहीए कि फ़ोरा इस हवाले से संजीदगी इख़तियार करते हुए इक़दामात करे ।

फ़िल वक़्त हैदराबाद और रंगा रेड्डी में तक़रीबन 40 अम्बो लिनस 108 ख़िदमात अंजाम दे रही हैं लेकिन एक में भी कोई ख़ातून नर्स नहीं है जब कि हर एम्बुलेन्स‌ रोज़ाना 3 ता 4हामिला ख़वातीन को दवाख़ाना पहुंचाती है और साल गुज़श्ता 250 डलिवरीज़ अम्बो लिनस के अंदर ही होती थी । एम्बुलेन्स‌ के अंदर ड्राईवर और टेक्नीशन को किसी भी हादिसा से फ़ौरी तौर पर निमटने की मुकम्मल तर्बीयत दी जाती है ।

और उन्हें डलिवरी के भी पूरी ट्रेनिंग दी जाती है । इस के बावजूद हर अम्बो लिनस में एक ख़ातून नर्स का होना बहुत ज़रूरी है । एम्बुलेन्स‌ मुलाज़मीन के मुताबिक़ इस सरवेस से 95 फ़ीसद ग़ैर मुस्लिमहज़रात इस्तिफ़ादा करते हैं । जब कि मुस्लमान सिर्फ 5 फ़ीसद इस से फ़ायदा हासिल करते हैं । एम्बुलेन्स‌ मुलाज़मीन ने मज़ीद बताया कि गुज़श्ता महीना मार्च से इस एम्बुलेन्स‌ की सर्विस में मज़ीद इज़ाफ़ा किया गया है ।

क‌लैक्टर ने अहकामात जारी किए हैं कि जबज़च्चा बच्चा हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हूँ तो उन्हें सहूलत के साथ हॉस्पिटल से घर भी 108 अम्बो लिनस के ज़रीया पहुंचाया जाय और इस ख़सूस में ख़ास ताकीद की गई है कि दो बजे के बाद मुलाज़मीन मैटरनिटी हॉस्पिटल ( सिटी कॉलिज ) के पास ही एम्बुलेन्स‌ को खड़ी करें ।

क्यों कि इस वक़्त ज़च्चा बच्चा को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जाता है । क़ारईन को मालूम रहे कि जब रियासत आंधरा प्रदेश में ये सरवेस शुरू की गई थी । उस वक़्त 802 एम्बुलेन्स‌ काम कररही थीं और अब सिर्फ 542 एम्बुलेन्स‌ इस काम के लिए हैं । मज़ीद ये कि हुकूमत ने 70 एम्बुलेन्स‌ और ख़रीदने का फ़ैसला लिया है जो एडवांस टैक्नालोजी से लैस होंगे और जिस के लिए 2.78 करोड़ रुपय मंज़ूर किए जा चुके हैं । पीटला बुरज ज़चगी ख़ाना में वक़फ़ा वक़फ़ा से 108 अम्बो लिनस हामिला ख़वातीन को लेकर पहुंचती हैं । एम्बुलेन्स‌ के एक टेक्नीशन ने बताया कि अक्सर नाख़्वान्दा ख़वातीन विलादत के आख़िरी लमहात में फ़ोन करती हैं ।

जिस से रास्ता में ही विलादत का क़वी इमकान होता है और इस से हमें भी मुश्किलात का सामना करना पड़ता है जब कि डाक्टर की बताई हुई तारीख़ के मुताबिक़ ही ख़वातीन को दवाख़ाना पहुंचना चाहिए । जिस से ख़ुदमरीज़ा को सहूलत हासिल होगी।बहरहाल ये किसी के भी तहत हो उस को रफ़ाही कामों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा आम करना चाहिए और ज़रूरत के मुताबिक़ इस में तबदीली भी करनी चाहीए जैसा कि ख़ातून नर्स की ज़रूरत का एहसास दिलाया गया है ।

हुकूमत से अपील की जाती है कि इस तरफ़ पेशक़दमी करे और अवाम को मज़ीद सहूलत फ़राहम करे नीज़ मुस्लमानों को एक बार फिर उस जानिब मुतवज्जा किया जाता है कि वो ज़माने सेबेख़बर हो कर ज़िंदगी ना गुज़ारें । सरकारी फ़लाही असकीमात से ज़्यादा से ज़्यादामुस्तफ़ीद हूँ ।।

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