Wednesday , January 17 2018

तिलंगाना और मर्कज़ का मोक़फ़

इलाक़ा तिलंगाना अवाम के साथ हुक्मराँ कांग्रेस और मर्कज़ की बेहिसी और मसला से अदम तवज्जही ने मुश्किलात को मज़ीद हआ दी है। कांग्रेस वुज़रा को अपने ही हुक्मराँ पर एतिमाद ना रहा। तिलंगाना के लिए एहतिजाज करने वाले वुज़रा की गिरफ़्तारी और

इलाक़ा तिलंगाना अवाम के साथ हुक्मराँ कांग्रेस और मर्कज़ की बेहिसी और मसला से अदम तवज्जही ने मुश्किलात को मज़ीद हआ दी है। कांग्रेस वुज़रा को अपने ही हुक्मराँ पर एतिमाद ना रहा। तिलंगाना के लिए एहतिजाज करने वाले वुज़रा की गिरफ़्तारी और रिहाई के बाद कांग्रेस के अंदर फ़रोग़ पाने वाली इंतिशारी कैफ़ीयत का बरवक़्त जायज़ा लेने के बजाय हालात को अबतर की सिम्त ढकेलने की आदत ने सूरत-ए-हाल को अवाम और आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को इक़तिसादी लिहाज़ से मफ़लूज करदिया है। आइन्दा भी यही सूरत-ए-हाल रही तो अवाम अपनी भूक की दिफ़ा के लिए हाथ में पत्थर उठा लें गे तो हुक्मराँ और इस के ग्रुप को बिगड़ती सूरत-ए-हाल को क़ाबू में लाने के लिए बहुत नाज़ुक दौर का सामना करना पड़ेगा। तलंगाना के मसला पर मर्कज़ और कांग्रेस के ज़िम्मेदारों की दानिस्ता ख़ामोशी ने एहितजाजी मुवाफ़िक़ तलंगाना पार्टीयों को मुश्तइल करदिया है। ये क़ाइदीन तलंगाना के लिए लड़ रहे हैं इन में कांग्रेस का तलंगाना ग्रुप अपनी राह भटक चुका है। टी आर इसके इलावा दीगर पार्टीयों के क़ाइदीन ने तिलंगाना को अवामी हक़ समझने के बजाय अपना सयासी हक़ समझ कर तहरीक को आगे ले जाने की कोशिश शुरू की है। हैदराबाद शहर को इंतिहाई खु़फ़ीया अंदाज़ में बदअमनी की आग में झोंकने की साज़िश के पीछे किस का हाथ है ये पता चलाने की फ़िलहाल किसी को फ़िक्र नहीं है मगर बंद, हड़ताल और तशद्दुद के ज़रीया शहर और इलाक़ा तिलंगाना में आम ज़िंदगी दरहम ब्रहम करके मर्कज़ को बेदार करने की अब तक की कोशिश का कोई नतीजा बरामद नहीं होसका ऐसे में कई गोशे पुरअमन एहतिजाज या अनाहज़ारे तर्ज़ की मुहिम चलाने का भी मश्वरा दे रहे हैं। एहतिजाज का रुख परतशद्दुद तो नहीं है लेकिन ज़्यादा मुद्दत तक आम ज़िंदगी मफ़लूज बनादी जाय तो इलाक़ा में इक़तिसादी तबाही के लिए किस को ज़िम्मेदार टहराया जाएगा। कई बार पहले भी ये साबित होचुका है कि मर्कज़ या कांग्रेस हाईकमान अपने मौक़िफ़ को वाज़िह करने में दयानतदाराना अमल से काम नहीं ले रहे हैं। तलंगाना हामीयों ने मर्कज़ के इस अदम बेदारी रवैय्या की वजह से ही तिलंगाना में एहतिजाज को शिद्दत तक ले जाने के लिए 2 रोज़ा रेल रोको, आटो बंद का एहतिजाज किया था जो सद फ़ीसद कामयाब रहा इस से करोड़ों रुपय का नुक़्सान बर्दाश्त किया गया। आम आदमी को बेशुमार तकालीफ़ का सामना करना पड़ा मगर रियास्ती चीफ़ मिनिस्टर और ना ही मर्कज़ का किसी ज़िम्मेदार वज़ीर ने इस जानिब तवज्जा दी। अब तलंगाना हामी इस महोख़वाब हुक्मराँ तबक़ा को बेदार करने के लिए फिर एक बार रास्ता रोको एहतिजाज, बंद का एहतिमाम करने जा रहे हैं। 30 सितंबर को हैदराबाद बंद मनाया जा रहा है। सवाल ये है कि आया अब तक के एहतिजाज ने मर्कज़ की तवज्जा मबज़ूल कराने में कामयाबी नहीं मिली इस के लिए तिलंगाना क़ाइदीन कांग्रेस को ही ज़िम्मेदार टहराते हैं। इलाक़ा तलंगाना में एहतिजाज को शिद्दत तक ले जाने में सिर्फ ताक़त का बाब खुला रखने से काम नहीं चलेगा। बिलाशुबा इलाक़ा के अवाम में मर्कज़ की बेएतिनाई की वजह से गम-ओ-ग़ुस्सा, इस्तिमाल और शिद्दत पसंदी जुज़वी तौर पर अपना असर दिखा रही है। रियास्ती हुकूमत ख़ासकर चीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी अगर हालात का इदराक करने में कोताही से काम लेंगे तो ग़ैर मुस्तहकम सयासी माहौल पैदा करने के लिए वो भी ज़िम्मेदार होंगे रियासत आंधरा प्रदेश में कांग्रेस अपने क़ियादत के फ़ुक़दान से दो-चार हो जाय तो तलंगाना के हामीयों के लिए भी ये फ़ायदेमंद साबित होगा या इस के बेहतर नताइज बरामद होंगें। ये मुस्तक़बिल के हालात पर मुनहसिर है। इस वक़्त कांग्रेस क़ाइदीन और हुकूमत को अपनी अपनी महिज़ ताक़त की सियासत और घमंड-ओ-तकब्बुर के वबा में मुबतला होने की ज़रूरत नहीं है। इन के मौक़िफ़ की वजह से ही इलाक़ा तलंगाना के मुआशरे पर मनफ़ी ज़बरदस्त असरात मुरत्तिब हो रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान को अब अपनी ख़ामोशी की पालिसी के नताइज की जानिब आँखें बंद करके रखनी नहीं चाहीए हालिया बंद, रेल रोको एहतिजाज, सरकारी मुलाज़मीन की हड़ताल से उभरने वाले हालात आने वाले संगीन ख़तरात का इशारा दे रहे हैं। तलंगाना के अवाम को इन ख़तरात से बेख़बर रख कर उन के क़ाइदीन मुवाफ़िक़ और मुख़ालिफ़ सयासी इबलाग़ मैं तलंगाना के मुतालिबा को मसख़ करने की ग़लती करेंगे तो तलंगाना इलाक़ा के जज़बा का हक़ीक़ी तक़ाज़ा पूरा नहीं करेगा। तलंगाना के लिए तमाम हुक़ूक़ के हुसूल को यक़ीनी बनाने के लिए जो एहतिजाज हो रहा है इस की बुनियाद पर कांग्रेस के क़ाइदीन का ग्रुप अपने लिए अलैहदा सयासी रास्ता हमवार करने की फ़िक्र में बे समिति का शिकार हो रहा है। काबीना में पाई जाने वाली इंतिशारी कैफ़ीयत का असर तलंगाना के मुस्तक़िल हालात पर पड़े तो इस के ज़िम्मेदारी किस के सर थोपी जाएगी। कांग्रेस के कुछ अरकान-ए-पार्लीमैंट और वुज़रा ने तलंगाना के लिए अपनी जद्द-ओ-जहद को हुकूमत और चीफ़ मिनिस्टर से तसादुम की शक्ल देने की कोशिश की है। दीगर तलंगाना हामीयों के नाम पर शरपसंद अनासिर की जानिब से तोड़ फोड़ और लौट मार के वाक़ियात आम हो जाएं तो मसला मज़ीद संगीन होगा। पुरअमन और गानधयाई तर्ज़ का एहतिजाज करने की तरग़ीब देने वालों की बात मान ली जाय तो इन्क़िलाब आएगा अज़ाब नहीं। इस ख़सूस मैं तवज्जा देने की ज़रूरत है तलंगाना का एहतिजाज 16 वें दिन में दाख़िल होचुका है लेकिन दिल्ली वाले हनूज़ अपने ही तनाज़आत में उलझे हुए हैं।

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