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तिहाड़ आइडलस है कैदियों का पुनर्वास, आत्मविश्वास का एक अनूठा प्रयास

नई दिल्लीः शायद कुछ लोगों के लिए अपराध करना आसान होता है, लेकिन अपराध करने के बाद पकड़े जाने पर उन्हें जो सजा-यातना झेलनी पड़ती है, वे सिर्फ वही जानते हैं, जो जेल में सलाखों के पीछे होते हैं। अपराध करने के बाद उन्हें अपने जीवन का असल महत्व समझ में आता है। जहां वे तिल-तिल अपनी जिंदगी को जीने की गुहार लगाते हैं। बहार की दुनिया के लोगों को उनका दर्द नहीं दीखता।

वे क्या सोचते हैं, उनकी मानसिक स्थिति क्या हो जाती है, इसका अंदाजा बहार रह रहे लोगों को नहीं होता। वे अपने परिवार वालों मित्रों से मिलने की भी आस छोड़ देते हैं। बहारी दुनिया से वे एकदम कट जाते हैं। फिर उनको जेल के नियमों के अनुसार जीना होता है। ऐसे लोगों में बहुत सारी प्रतिभाएं छुपी होती हैं, जिसको वे व्यक्त करना चाहते हैं।

म्युजिक वन रिकॉर्ड के तहत सन् 2012 से सन् 2017 तक लगभग हजारों कैदियों ने ‘तिहाड़ आइडलस’ में बढ़-बढ़ कर हिस्सा लिया, जिसमें प्रभावी और सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए। अभी तक लगभग 300 वंदी भाई-बहन जेल से बाहर निकलने के बाद म्यूजिक के अंतर्गत व्यवसाय चला रहे हैं।

इस अनूठे प्रयास में अभी तक सोनू निगम, अनुराधा पौडवाल, दर्शन कुमार, सुरेश वाडेकर, सुधा चंद्रन, सुनील पाल, नचिकेता जोशी, राजीव दिनकर, सहजाद खान, सूरज पंडित ज्वाला प्रसाद, सोनिका गिल, प्रिंस, नीशा बवानी, अरविंद बबल जैसी बॉलीवुड हस्तियों ने इस पहल में अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम को होस्ट रवि त्रिपाठी, मिनी दिवान और जानवी ने किया है।

इस अवसर पर डीजीपी अजय कश्यम ने कहा कि हम समाज में रह रहे लोगों से यह अपिल करते हैं कि जेलों में बंद कैदियों को घृणा की दृष्टि से न देखा जाए, उनके प्रति भी एक सकारात्मक नजरिया रखें। यह सत्य है कि उन्होंने अपराधा किया है, लेकिन उन्हें कला और संगीत के माध्यम से उनमें रचनात्मक विकास करना उनके जीवन की एक सही दिशा होगी।

‘तिहाड़ आइडलस’ की खूबसूरत ऐतिहासिक यात्रा जेल प्रशासन के सहयोग से संकल्पना निर्माता और निर्देशक नरेश बैंसला ने शुरू की। उन्होंने कहा कि हम लोग बंदी भाई-बहनों की प्रतिभाएं और सकारात्मक सोच को तिहाड़ आइडलस टीवी रियलटी शो के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं। 31 एपिसोड के माध्यम से दुनिया के प्रसारित होगा, जिससे बंदियों के प्रति समाज का नजरिया बदलेगा। खासकर यह लोग जब जेल से रिहा हों तो वे फिर से अपराधा की दुनिया में न लिप्त हों।

शो की ग्रांड स्क्रीनिंग दौरान बैंसला जी ने धन्यवाद देते हुए कहा कि हमें तिहाड़ जेल अधिकारियों का सर्मथन प्राप्त हुआ है, जिसके लिए हम अजय कशयप (डीजीपी), नीरज कुमार (पूर्व डीजीपी), विमला मैहरा (पूर्व डीजीपी), सुधिर यादव (पूर्वडीजीपी), राजकुमार एवं आईजी, एसएस परिहार (डीआईजी), जितेंद्र अग्रवाल (डीआईजी) आदि लोगों के दिल से आभारी हैं। इसी के साथ हम रचना जैन (सह निर्माता), ममता बैंसला (सहयोगी निर्माता) और आनंद साहू, मोहन सिंह आलुवालिया के योगदान के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं।

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