तीन तलाक़ बिल नहीं पास करा पाई मोदी सरकार, क्या हमें भी गंभीरता की है जरुरत?

तीन तलाक़ बिल नहीं पास करा पाई मोदी सरकार, क्या हमें भी गंभीरता की है जरुरत?

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के इस कार्यकाल का आखिरी बजट सत्र कल समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 का लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे। इसके बाद से ही मोदी सरकार ने कई बिल बनाए और कई विवादित मुद्दों पर कानून बनाने की कोशिश की।

सरकार ने मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक पर भी कानून बनाने की कोशिश की इस क्रम में सरकार इसे लेकर एक अध्यादेश भी लेकर लेकिन उसकी समय सीमा पूरी होने से पहले सरकार इसे कानून की शक्ल नहीं दे सकी। कल बजट सत्र का अंतिम दिन था लेकिन इस दिन भी सरकार तीन तलाक और ऐसे ही कुछ अन्य बिल को पास नहीं करा स्की।

इंडियन मुस्लिम प्रो पर छपी खबर के अनुसार, केंद्र सरकार अपने दो सबसे महत्वपूर्ण और महत्वकांक्षी बिल तीन तलाक और नागरिकता बिल को भी राज्यसभा स्थगित होने से पहले पास नहीं करा सकी जिसके चलते अब यह ठंठे बस्ते में चले गए है। तीन तलाक पर लाया गया बिल सरकार ने 27 दिसंबर 2018 को नागरिकता बिल को 8 जनवरी को लोकसभा से पास कराया था।

चूंकि मोदी सरकार लोकसभा में पूर्ण बहुमत रखती है इसलिए इन दोनों ही बिलों को लोकसभा से पास कराने में कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन जब बात राज्यसभा से पास कराने की आई तो फिर मोदी सरकार असफल हो गयी। दोनों ही बिल में राज्यसभा के अनुसार कई कमियों थी और सरकार ने बिल को जल्द बजी में तैयार किया था।

केंद्र सरकार के पास राज्यसभा से इन्हें पास करने के लिए 13 फरवरी अंतिम दिन था। अब सांसद दुबारा तब बैठेगी जब देश में अगली सरकार आ जाएगी। यानि की लोकसभा चुनाव के बाद जब सरकार का गठन हो जाएगा तभी संसद का सत्र बुलाया जाएगा।

लेकिन खास बात यह है कि आने वाली सरकार को इन दोनों ही बिलों को अगर कानून का रूप देना है तो उन्हें इस पर फिर से शुरू से ही काम करना होगा और लोकसभा और राज्यसभा में इसे पास करना होगा। दरअसल जब भी कोई सरकार का कार्यकाल खत्म होता है तो उस समय अटके पड़े हुए सभी बिल निरस्त हो जाते है।

केंद्र सरकार ने बजट सत्र के दौरान इन दोनों ही बिलों को राज्यसभा में पेश ही नहीं किया और करने का कोई फायदा ही नहीं था। इन बिलों को लेकर जितना विरोध देखने को मिल रहा था उसे देखते हुए केंद्र सरकार समझ चुकी थी की अब इनका पास होना मुश्किल हैं।

राज्यसभा में इन बिलों और राफेल में हुए कथित घोटते को लेकर इतना विरोध था कि सरकार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास करने में भी पसीने छुट गए। सरकार ने धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर बहस कराने की काफी कोशिश लेकिन इन्हें बिना बहस ही पास करना पड़ा।

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