तीन-तलाक़ बिल: बीजेपी के लिए राजनीतिक मुद्दा और मुसलमानों को सिर्फ़ इस्लामिक लॉ मंजूर!

तीन-तलाक़ बिल: बीजेपी के लिए राजनीतिक मुद्दा और मुसलमानों को सिर्फ़ इस्लामिक लॉ मंजूर!

भारतीय जनता पार्टी ने ट्रिपल तलाक को मुद्दा बनाया हुआ है। उत्तर प्रदेश के पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा इसे जोर शोर से उठाती रही है। उसका मानना है कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा होगी।

डी डब्ल्यू हिन्दी न्यूज़ पोर्टल के अनुसार, विधेयक में भी उद्देश्य और कारण बताते हुए लिखा गया है कि उच्चतम न्यायलय द्वारा तलाक ए बिद्दत को खत्म करने के बाद और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आश्वासन के बाद भी देश से तलाक ए बिद्दत के मामले आ रहे थे।

ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2017 को एक शायरा बानो के केस में बहुमत के फैसले 3:2 के आधार पर ट्रिपल तलाक को गलत करार दिया था।

मुसलमानों में एक बात साफ है. उनके धर्म में शादी कोई सात जन्मों का बंधन नहीं है। ये महज एक कॉन्ट्रैक्ट है जो लड़का और लड़की के बीच होता है। जिसमें लड़का एक तयशुदा रकम मेहर के रूप में अदा करता है। ये सब लिखित रूप में गवाह, वकील और काजी की मौजूदगी में होता है। अब अगर कॉन्ट्रैक्ट है तो उससे अलग होने के तरीके भी होंगे।

इधर बात चली हैं तो ये भी सामने आया हैं कि निकाहनामा में बदलाव करके उसे मॉडल बनाया जा सकता हैं। लखनऊ में ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के अनुसार लड़की भी चाहे तो तलाक दे सकती है।

इसके लिए लड़की निकाहनामे में ये शर्त रख सकती है कि ट्रिपल तलाक नहीं होगा। इसके अलावा लड़की चाहे तो अपने तरफ से भी तलाक दे कर विवाह को खत्म कर सकती है।

वैसे जिस तलाक ए बिददत की बात हो रही हैं उसमें भी ये प्रावधान है कि पहले और दूसरी बार तलाक कहने में समय का अंतर होना चाहिए और इस दौरान परिवार के बड़ो को विवाह को बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

विपक्ष भले ही इसको मुद्दा बना ले लेकिन आने वाले समय में अगर ये विधेयक लागू हो गया तो मुकदमे, गिरफ्तारियां और सजा तो होनी ही है। वैसे भी ट्रिपल तलाक मुसलमानों में सिर्फ सुन्नी समुदाय तक सीमित हैं। शिया समुदाय में ट्रिपल तलाक मान्य नहीं है।

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