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तीन तलाक के मसले पर दारुल उलूम जाएगा सुप्रीम कोर्ट

तीन तलाक के मसले पर दारुल उलूम जाएगा सुप्रीम कोर्ट

लखनऊ। दारुल उलूम देवबंद तलाक के मामले में दखलंदाजी से बेहद नराज है। इसे पर्सनल ला में हस्तक्षेप करार देते हुए तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में विरोध करने का फैसला किया है। दारुल उलूम का कहना है कि भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां हर को मजहबी आजादी हासिल है।
बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर तीन तलाक व चार शादियों के नियम को सही ठहराए जाने की दलील पेश की थी। दारुल उलूम व देवबंदी के उलेमा ने भी इसे सही करार दिया था। अब केंद्र सरकार ने तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। इसकी दलील है कि तीन तलाक के मसले को समान नागरिक संहिता के नजरिए से देखा जाना चाहिए। इस बारे में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी का कहना है कि संविधान के मुताबिक, भारत में सभी लोगों को अपने धर्म के अनुसार जीने का अधिकार है। मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करने की बात सोचना उचित नहीं । आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना इस्लाम कासमी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर कोई भी फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ को सामने रखकर ही लेगा।

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