Saturday , December 16 2017

तीन तलाक मामले में केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नोटिस

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़, निकाह हलाला और बहुविवाह को ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक बताने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता इशरत जहां की इस अर्जी पर अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। तलाक़-ए-बिद्दत के तहत कोई मुस्लिम मर्द एक ही तुह्र (दो मासिक धर्म के बीच की अवधि) या संभोग के बाद एक तुह्र में एक से ज्यादा बार तलाक बोलकर अपनी बीवी को तलाक देता है या फिर एक ही बार में तीन बार तलाक बोलकर एकतरफा तलाक देता है। निकाह हलाला किसी औरत की किसी दीगर सख्श से शादी से जुड़ी प्रथा है जिसमें मर्द एक औरत को तलाक दे देता है ताकि औरत का पिछला शौहर उससे फिर शादी कर सके।

अपने शौहर द्वारा दुबई से फोन पर तलाक दिए जाने के बाद एक मुस्लिम औरत ने एक से ज्यादा शादी, तीन तलाक (तलाक़-ए-बिद्दत) और निकाह हलाला जैसी मुस्लिम मजहब की प्रथाओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अपने शौहर द्वारा दुबई से फोन पर तीन बार तलाक बोलने के कारण तलाकशुदा हुईं 26 साल की मुस्लिम खातून, जो कोलकाता की रहने वाली है, की अर्जी पर गौर करते हुए चीफ़ जस्टिस टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और दीगर को नोटिस भेजा। अदालत ने वकील वी के बैजू के जरिए दाखिल इस अर्जी को उन याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जिन पर छह सितंबर को सुनवाई होने वाली है।

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