तुर्की को धमनियों की भाषा में कभी नहीं झुका सकता है अमेरिका- एर्दोगन

तुर्की को धमनियों की भाषा में कभी नहीं झुका सकता है अमेरिका- एर्दोगन
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तुर्की और अमेरिका के बीच बढ़ता विवाद और गहरा गया है। जब अमरीका एंड्र्यू ब्रुसन नाम के पादरी की रिहाई की मांग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नाटो सहयोगी तुर्की पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिये।

बता दें कि अमरीका एंड्र्यू ब्रुसन नाम के जिस पादरी की रिहाई की मांग कर रहा है। दरअसल वह दो साल से तुर्की की हिरासत में हैं। तुर्की ने साल 2016 के नाकाम तख़्तापलट के साज़िशकर्ताओं से संपर्क होने के आरोप में उसे हिरासत में लिया था।

इस मामले में राष्ट्रपति अर्दोगान ने शनिवार को एक रैली में कहा, “एक पादरी की वजह से तुर्की को धमकी देकर झुकाने की कोशिश करना ग़लत है। शर्म करो, शर्म करो। आप अपने नेटो सहयोगी को एक पादरी के लिए धमका रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”आप इस देश को धमकियों की भाषा से कभी नहीं झुका सकते। हमने न कभी इंसाफ़ से समझौता किया है और न कभी करेंगे।”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को तुर्की से स्टील एवं एल्युमिनियम के आयात पर शुल्क दोगुना करने की घोषणा की है। ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा, “मैंने तुर्की के इस्पात और एल्युमिनियम पर शुल्क दोगुना करने की अनुमति दे दी है।

उनकी मुद्रा लीरा हमारे बेहद मजबूत डॉलर के मुकाबले तेजी से नीचे गिर रही है। अभी तुर्की के साथ हमारे संबंध ठीक नहीं हैं।”

दूसरी और ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने तुर्की और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद में कूदते हुए आज वाशिंगटन पर आरोप लगाया कि उसे ‘‘प्रतिबंध लगाने और धौंस दिखाने की लत’’ लग गयी है।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका को प्रतिबंधों और धमकाने की लत से मुक्ति पानी चाहिये नहीं तो समूची दुनिया मौखिक निंदा से आगे बढ़कर उसे मजबूर करने के लिये एकजुट हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले भी पड़ोसियों के साथ खड़े हुए हैं और अब भी ऐसा करेंगे।’’

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