Friday , December 15 2017

तूफ़ानी बारिश में अबदुल्लाह क़ुतुब शाही मस्जिद गुलशन कॉलोनी को नुक़्सान

गुंबदान क़ुतुब शाही को महकमा आसार क़दीमा ने कमाई का एक ज़रीए बना लिया है। सालाना सैयाहों से करोड़ों रुपये वसूल किए जाते हैं। लेकिन अफ़सोस कि रियासती महकमा आसार क़दीमा को गुंबदान क़ुतुब शाही ही नहीं बल्कि शहर में क़ुतुब शाही और आसिफ़जाही ह

गुंबदान क़ुतुब शाही को महकमा आसार क़दीमा ने कमाई का एक ज़रीए बना लिया है। सालाना सैयाहों से करोड़ों रुपये वसूल किए जाते हैं। लेकिन अफ़सोस कि रियासती महकमा आसार क़दीमा को गुंबदान क़ुतुब शाही ही नहीं बल्कि शहर में क़ुतुब शाही और आसिफ़जाही हुक्मरानों के तामीर कर्दा तारीख़ी आसार ख़ासकर फ़ने तामीर की शाहकार मसाजिद के तहफ़्फ़ुज़ उन की निगहदाश्त से एक तरह की चिड़ है जिस के बाइस वो मुस्लिम हुक्मरानों के तामीर कर्दा तारीख़ी आसार के मुजरिमाना ग़फ़लत बरतने को अपना नस्बुलऐन समझता है।

गुंबदान क़ुतुब शाही में जहां क़ुतुब शाही बादशाहों और शाही ख़ानदान के अरकान की क़ुबूर हैं हर रोज़ तीन ता चार हज़ार सैयाह आते हैं जब कि महकमा आसार क़दीमा 105 एकड़ अराज़ी पर फैले गुंबदान क़ुतुब शाही को जो दरअसल एक शाही क़ब्रिस्तान है फिल्मों की शूटिंग के लिए किराया पर भी देता है। मुक़ामी मुसलमानों का कहना है कि महकमा आसार क़दीमा एक तरह से क़ब्रिस्तान की बेहुर्मती कर रहा है।

महकमा आसार क़दीमा सब से ज़्यादा ग़फ़लत तारीख़ी मसाजिद से बरतता है। वो ऐसा क्यों करता है इस का जवाब आला ओहदेदार ही बेहतर अंदाज़ में दे सकते हैं। शहर में दो यौम से शदीद बारिश का सिलसिला जारी है।

कल तूफ़ानी बारिश में जब कि सारे शहर की सड़कों पर पानी जमा हुआ था गुंबदान क़ुतुब शाही के अहाता में वाक़े 22 मसाजिद में से एक तारीख़ी और आबाद मस्जिद अबदुल्लाह क़ुतुब शाही के मीनार का एक हिस्सा मुनहदिम हो गया जिस के साथ ही मुक़ामी मुसलमानों में बेचैनी की लहर पैदा हो गई।

इंसाफ़ पसंद माहिरीन आसार क़दीमा और मस्जिद कमेटी का कहना है कि ये मस्जिद इंतिहाई शिकस्ता हो गई है उस की छत से बारिश के दौरान पानी रिस रहा है। ऐसे में वो कभी भी मुनहदिम हो सकती है।

ताहम महकमा आसार क़दीमा के मुतअस्सिब ओहदेदारों की बेहिसी का हाल ये है कि 15 साल क़ब्ल आबाद हुई इस मस्जिद की शिकस्ता हाली के बावजूद उस की मुरम्मत दाग़ दोज़ी पर कोई तवज्जा नहीं दी गई। वाज़ेह रहे कि इस तारीख़ी मस्जिद में हर नमाज़ में 150 ता 200 मुसल्ली होते हैं जब कि नमाज़ जुमा में 1000 शरीक होते हैं।

मस्जिद कमेटी का कहना है कि मस्जिद की मुरम्मत के लिए 9.5 लाख रुपये का तख़मीना बताया गया था लेकिन महकमा आसार क़दीमा ने ख़ामूशी इख़्तियार करली। बहरहाल ज़रूरत इस बात की है कि महकमा आसार क़दीमा के ओहदेदार तारीख़ी आसार की तबाही पर ग़फ़लत की नींद सोने की रविश तर्क कर दें।

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