तेजाबकांड में शहाबुद्दीन समेत चारों मुलजिमों को उम्रकैद की सजा

तेजाबकांड में शहाबुद्दीन समेत चारों मुलजिमों को उम्रकैद की सजा
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पटना : तेजाब कांड में आज शहाबुद्दीन व दीगर मुल्जिमान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सजा की सुनवाई जेल में तशकील खुसुसि अदालत में हुई। शहाबुद्दीन को सजा सुनाये जाने को लेकर सीवान में सेक्युर्टी निज़ाम चुस्त-दुरुस्त कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर सेक्युर्टी तैनात कर दिये गये हैं।

अभियोजन पक्ष के स्पेशल पीपी जयप्रकाश सिंह ने एक दिन पहले ही कह दिया था कि इस इल्ज़ाम में कम से कम उम्रकैद की सजा हो सकती है। उनका कहना है कि इससे भी बड़ी सजा से इनकार नहीं किया जा सकता है। मुजरिम करार देने के बाद पूरे दिन सियासी हलकों से लेकर आम लोगों के दरमियान बहस का मुद्दा रही।

शहाबुद्दीन पर 302, 201, 364ए व 120 बी के तहत शहर के कारोबारी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश राज व सतीश राज का यरगमाल कर तेजाब से नहलाकर कत्ल करने व सुबूत मिटाने का इल्ज़ाम लगाया गया है। वहीं दीगर मुल्जिमान राजकुमार साह, आरिफ व शेख असलम को दफा 302 व 201 से आज़ाद करते हुए यरगमाल करने का इल्ज़ाम लगाया गया है। यानी शहाबुद्दीन व दीगर मुल्जिमान को अलग-अलग दफा में मुजरिम करार दिया गया है।

वाकिया के बाद तीसरा यरगमाल हुये व चश्मदीद गवाह राजीव रौशन घर छोड़कर गोरखपुर भाग गया था। वह डर से सीवान नहीं आ रहा था। पुलिस ने इस कांड में शहाबुद्दीन का नाम लिया तब जाकर राजीव रौशन गवाही देने के लिए वाकिया के सात साल बाद सीवान आया।

दोनों यरगमाल हुये का बड़ा भाई राजीव रौशन खुद को चश्मदीद गवाह बताते हुए अदालत में हाजिर हुआ। उसकी गवाही के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है। उसने गवाही में शहाबुद्दीन की तरफ दो लाख की रंगदारी मांगने व प्रतापपुर में हाजिर होकर दोनों भाइयों को तेजाब से नहलाकर कत्ल करने का इल्ज़ाम लगाया था। उसने सुबूत मिटाने का भी इल्ज़ाम लगाया था।

 

 

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