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तेज बहादुर की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट ने पूछा, BSF अफसर इतने पत्थरदिल क्यों

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीएसएफ जवान तेज बहादुर की पत्नी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई किया। सुनवाई के दौरान ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि बीएसएफ के अफसर इतने पत्थरदिल और असंवेदनशील क्यों हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि तेज बहादुर की पत्नी के पूछे सवालों का कोई जवाब क्यों नहीं देता।

याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, “हम आपके नियमों के बीच नहीं आना चाहते। लेकिन हम खौफ के साए में जी रही तेजबहादुर की पत्नी की मनोस्थिति से चिंतित है। उनको पति की चिंता है। उनकी शंका दूर कीजिए।”

इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पत्नी की पति से मुलाकात में हमें कोई समस्या नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले की सुनवाई 15 फरवरी को तय कर रहे हैं, तब तक तेजबहादुर की पत्नी पति से मिलकर लौट आएंगी।

बता दें कि सेना में खराब खाने की शिकायत करने वाले बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव की पत्नी शर्मिला ने दिल्ली हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाला था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति को अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया है और उन्हें उनके पति से बात नहीं करने दिया जा रहा है।

हालांकि बीएसएफ और केंद्र की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि जवान हिरासत में नहीं है। उनका जम्मू के सांबा में कालीबाड़ी स्थित 88वीं बटालियन के हेडक्वार्टर में तबादला किया गया है।

दूसरी तरफ बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने जोधपुर में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने तेज बहादुर को बंदी बनाने के शर्मिला के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि तेज बहादुर ने खराब खाने के जो आरोप लगाए हैं, उसकी जांच के लिए उन्हें जम्मू-कश्मीर के सांबा में रखा है। तेज बहादुर की पत्नी से रोज मोबाइल पर बात हो रही है। जांच के बाद ही तेज बहादुर को वीआरएस मिलेगी।

 

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