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तेलंगाना-ओ-आंध्र प्रदेश में 81,591 एकऱ् ओक़ाफ़ी अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़े

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश रियासतों में 81,591 एकऱ् ओक़ाफ़ी आराज़ीयात पर नाजायज़ क़बज़े और 3,841 मुक़द्दमात मुख़्तलिफ़ अदालतों में ज़ेर दौरान हैं।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश रियासतों में 81,591 एकऱ् ओक़ाफ़ी आराज़ीयात पर नाजायज़ क़बज़े और 3,841 मुक़द्दमात मुख़्तलिफ़ अदालतों में ज़ेर दौरान हैं।

सैंकड़ों मुक़द्दमात एसे हैं जिन में वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से अदालतों में जवाबी हलफ़नामा दाख़िल नहीं किया गया इन में बाज़ मुक़द्दमात की पिछ्ले 10 बरसों से वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से कोई पैरवी नहीं की गई।

करोड़ों रुपये मालियती ओक़ाफ़ी जायदादों पर नाजायज़ क़बज़े और अदालतों में जारी मुक़द्दमात की अदम यकसूई के बारे में सनसनीखेज़ इन्किशाफ़ आज स्पेशल ऑफीसर वक़्फ़ बोर्ड तरफ जलालुद्दीन अकबर ने किया।

उन्होंने क़ानूनी माहिरीन पर मुश्तमिल एडवाइज़री कमेटी के तआरुफ़ के मौके पर अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए इस बात पर अफ़सोस का इज़हार किया कि ओक़ाफ़ी जायदादों के तहफ़्फ़ुज़ के सिलसिले में वक़्फ़ बोर्ड के वुकला और लीगल डिपार्टमेंट की कारकर्दगी तवक़्क़ो के मुताबिक़ नहीं है।

उन्होंने कहा कि आंध्र इलाक़ा में 1616 ओक़ाफ़ी इदारों के तहत 27 हज़ार 44 एकऱ् अराज़ी मौजूद है जिस में 16,349 एकऱ् अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़े हैं जबकि राइलसीमा में 1930 ओक़ाफ़ी इदारों के तहत 40929 एकऱ् अराज़ी मौजूद है जिस में 7818 एकऱ् अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़े हैं जबकि तेलंगाना में 32157 ओक़ाफ़ी इदारों के तहत 77538 एकऱ् अराज़ी मौजूद है जिस में 57423 एकऱ् अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़े हैं।

इस तरह दोनों रियासतों में मजमूई तौर पर 81591 ओक़ाफ़ी आराज़ीयात पर नाजायज़ क़बज़े हैं। उन्होंने बताया कि ओक़ाफ़ी जायदादों से मुताल्लिक़ 3841मुक़द्दमात मुख़्तलिफ़ अदालतों में ज़ेर दौरान हैं जिस में सुप्रीम कोर्ट(30), हाईकोर्ट (1628), वक़्फ़ ट्रब्यूनल (1912), डिस्ट्रिक्ट ऐंड मुंसिफ़ कोर्टस (185)और दूसरी अदालतों में 86 मुक़द्दमात ज़ेर दौरान हैं।

हाई कोर्टस और वक़्फ़ ट्रब्यूनल में बोर्ड की तरफ़ से 6-6 स्टेंडिंग कौंसिलस हैं इस के अलावा बाज़ अहम मुक़द्दमात के सिलसिले में सीनीयर वुकला की ख़िदमात हासिल की गई हैं।

उन्होंने कहा कि हालिया अर्सा में उन्हें हाईकोर्ट ने तलब करते हुए वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से हलफनामे दाख़िल ना किए जाने की तरफ तवज्जा दिलाई। कई मुक़द्दमात में दस बरसों से जवाबी हलफ़नामा दाख़िल नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि जज ने उन्हें बताया कि बाज़ मुक़द्दमात में वक़्फ़ बोर्ड के वकील पेशी के दिन हाज़िर नहीं रहते। जवाबी हलफनामों के इदख़ाल में तसाहुल और ताख़ीर के सबब वक़्फ़ बोर्ड को कई क़ीमती जायदादों से हाथ धोना पड़ रहा है।

उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की के क़ानूनी मुशावरती कमेटी की तशकील के बाद ओक़ाफ़ी जायदादों के मुक़द्दमात की यकसूई में बेहतरी पैदा होगी और अहम-ओ-क़ीमती ओक़ाफ़ी जायदादों का तहफ़्फ़ुज़ होपाए गा।

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