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तेलंगाना का सालाना बजट 1,30,415,87 करोड़ रुपये पर मुश्तमिल

हैदराबाद 15 मार्च: तेलंगाना क़ानूनसाज़ असेंबली में रियासत का सालाना बजट पेश किया गया। वज़ीर फाइनैंस ई राजिंदर ने बराए साल 2016-17 की बाबत जुमला (1,30,415.87) करोड़ रूपियों के मसारिफ़ पर मुश्तमिल सालाना बजट की तजवीज़ पेश की जिसमें ग़ैर मन्सूबा जाती मसारिफ़ (62,786.14) करोड़ रुपये और मन्सूबा जाती मसारिफ़ (67,630.73) करोड़ रुपये शामिल हैं जबकि बिलख़सूस अक़लियती तबक़ात की बहबूद के लिए पिछ्ले साल के मुक़ाबिला में किसी क़दर रक़ूमात में इज़ाफ़ा करते हुए साल 2016-17 के लिए (1204) करोड़ रूपियों पर मुश्तमिल बजट पेश किया गया है।

एवान असेंबली में वज़ीर फाइनैंस ने अपनी बजट तक़रीर करते हुए कहा कि साल 2016-17 का तजवीज़ करदा बजट अवाम पर कोई माली बोझ डाले बग़ैर वसाइल में इज़ाफे की भरपूर कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि अगरचे मुवाज़ना बराए साल 2016-17 रियासत तेलंगाना का तीसरा मुवाज़ना है लेकिन ये पहला मुवाज़ना है जोकि तमाम उमोर मसारिफ़ का जामा जायज़ा लेने और वसाइल के दस्तयाब आदाद-ओ-शुमार की बुनियाद पर हक़ीक़त पसंदाना तजज़िया करने के बाद मुरत्तिब किया गया।

उन्होंने कहा कि माज़ी में तेलंगाना की मआशी तरक़्क़ी उस के इंफ्रास्ट्रक्चर और समाजी शोबों को दानिस्ता तौर पर नजरअंदाज़ कर देने और इस के वसाइल का रुख साबिक़ा मुत्तहदा रियासत के दुसरे इलाक़ों की तरफ़ मोड़ देने के सबब उस की क़ुव्वत से कहीं कम थी। ई राजिंदर ने बताया कि हमारी अपनी रियासत की तशकील से हमने आबपाशी के लिए हमारे पानी , माली वसाइल और रोज़गार पर क़ाबू हासिल कर लिया है। इस की वजहा से तेलंगाना की मईशत जकड़बंदियों से आज़ाद हो गई और तरक़्क़ी के सफ़र में एक लंबी आज़ादी लगाई है जिसका मुशाहिदा रियासत तेलंगाना की तशकील के बाद से हासिल होने वाली तरक़्क़ी की शरह से किया जा सकता है।

ई राजिंदर ने कहा कि तेलंगाना 2 जून 2014 तक बंद पिंजरे का शेर था लेकिन अब ये रियासत तमाम बंदिशों-ओ-जकड़बंदियों से आज़ाद है और अब ये मुल्क भर में तेज़-रफ़्तार तरक़्क़ी करते हुवे उभरेगी। उन्होंने कहा कि मुख़्तसर मुद्दत के अंदर हमने अवाम का एतेमाद हासिल किया कि हुकूमत अवाम की बहबूद पर अव्वलीन तर्जीह दे रही है खास्कर ग़रीब , बेसहारा, यतीमों और की मदद करने के लिए हमा मक़सदी इक़दामात तेलंगाना हुकूमत कर रही है।

जारीया साल शादी मुबारक स्कीम को मुतआरिफ़ करके (100) करोड़ रुपये की रक़म फ़राहम की और उन रक़ूमात का मुकम्मल इस्तेमाल भी किया गया।

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