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तेल उत्पादन करने वाले देशों में वो क्षमता नहीं जो पुरी दुनिया में तेल की कमियों को पुरा कर सके- ईरान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नबंबर महीने तक ईरानी तेल के निर्यात को शून्य तक पहुंचा देना चाहते हैं और इस दिशा में उन्होंने कार्य भी आरंभ कर दिया है।

प्रश्न यह है कि क्या अमेरिका की एक पक्षीय नीतियों में इस बात का दम है कि वे ईरान जैसे तेल उत्पादक महत्वपूर्ण देशों का नाम विश्व की तेल मंडियों से समाप्त कर दें? या अमेरिका की एकपक्षीय नीति पर अमल करने की स्थिति में जो परिणाम सामने आयेंगे उनकी भविष्यवाणी की जा सकती या उन पर नियंत्रण किया जा सकता है?

ईरानी तेल आयात को शून्य तक पहुंचाने के संबंध में अमेरिकी प्रयास के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने जो बातें कहीं हैं उनसे इन प्रश्नों का उत्तर भलीभांति दिया जा सकता है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी तेल के बहिष्कार के लिए जो रास्ता व नीति अपनाई है वह सही नहीं है। राष्ट्रपति हसन रूहानी ने सोमवार की रात को स्वीज़रलैंड में रहने वाले ईरानियों से भेंट में कहा था कि अमेरिकियों ने दावा है कि वे ईरान के तेल आयात को पूरी तरह बंद करना चाहते हैं।

वे इस बात के अर्थ को नहीं समझते हैं। क्योंकि इस बात का कोई मतलब ही नहीं है कि मूल रूप से ईरान के तेल का निर्यात ही न हो और उस समय क्षेत्र के तेल का निर्यात हो। राष्ट्रपति ने अमिरिकियों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर यह काम काम आप कर सकते हैं तो करें ताकि आप लोग इसके परिणाम को भी देख लें।

अमेरिकी टीवी चैनल ब्लूमबर्ग ने घोषणा की है कि नवंबर महीने में ईरान पर प्रतिबंध लग जाने की स्थिति में तेल का उत्पादन करने वाले देशों में यह क्षमता ही नहीं है कि वे ईरानी तेल की कमी को पूरा कर सकें।

बहरहाल ईरानी तेल का पूरी तरह से बहिष्कार कर देना ट्रम्प के लिए कोई सरल कार्य नहीं है यहां तक कि तकनीकी दृष्टि से यह कार्य सऊदी अरब की भी क्षमता से बाहर है और इस समय की स्थिति और वास्तविकताओं के दृष्टिगत पूर्णरूप से ईरानी तेल का बहिष्कार विश्व के हित में नहीं है और ईरान जैसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक देश के तेल का बहिष्कार किसी खतरनाक परिणाम के बिना नहीं रहेगा।

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