Tuesday , April 24 2018

तौहीने रिसालत के ख़िलाफ़ आलमी क़ानून बनाने हुर्मत अंबिया कान्फ़्रैंस का मुतालिबा

सऊदी अरब के शहर मदीना मुनव्वरा में मुनाक़िदा तीन रोज़ा हुर्मत अंबिया कान्फ़्रैंस के इख़तेताम पर बर्गुज़ीदा हस्तीयों की तौहीन को काबिले मुवाख़िज़ा जुर्म क़रार देते हुए उस की रोक-थाम के लिए आलमी सतह पर क़ानूनसाज़ी का मुतालिबा किया है। ज़

सऊदी अरब के शहर मदीना मुनव्वरा में मुनाक़िदा तीन रोज़ा हुर्मत अंबिया कान्फ़्रैंस के इख़तेताम पर बर्गुज़ीदा हस्तीयों की तौहीन को काबिले मुवाख़िज़ा जुर्म क़रार देते हुए उस की रोक-थाम के लिए आलमी सतह पर क़ानूनसाज़ी का मुतालिबा किया है। ज़राए इबलाग़ ने आलमी कान्फ़्रैंस के इख़तेताम पर जारी आलामीया के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है।

कि अंबिया की तौहीन नाक़ाबिले माफ़ी जुर्म क़रार दिलवाने के लिए आलमी सतह पर एक मुशतर्का “मीसाक़” किया जाए ताकि आइन्दा ऐसी मुजरिमाना हरकतों का सद बाब किया जा सके।

आलामीए में नबी आख़िरुज्ज़मा सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम की इज़्ज़त और नामूस को यक़ीनी बनाने के लिए खासतौर पर ज़ोर देते हुए कहा गया कि हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम की हुर्मत के लिए ना सिर्फ़ मुसलमान बल्कि पूरी दुनिया के मज़ाहिब एक मुआहिदा करें जिस में आख़िरी पैग़ंबर की तौहीन को नाक़ाबिले माफ़ी जुर्म क़रार दिया जाए।

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