त्रिपुरा की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद हमारे कार्यकर्ता डर- डर जी रहे हैं- सीताराम येचुरी

त्रिपुरा की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद हमारे कार्यकर्ता डर- डर जी रहे हैं- सीताराम येचुरी
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कल शाम से यह खबर सुर्खियों में थी कि माकपा ने त्रिपुरा की शेष बची एक सीट का चुनाव नहीं लड़ेगी। वह वहां अपना कोई उम्मीदवार भी खड़ा नहीं करेगी।

इस खबर से ऐसा लगने लगा था, कि त्रिपुरा में करारी हार के बाद माकपा ने राज्य में चुनाव से पलायन कर दिया है। लेकिन आज माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने चुनाव से अपना नाम वापस लेने का खुलासा किया।

उल्लेखनीय है कि माकपा द्वारा चारीलाम सीट से चुनाव न लड़ने की बात कही थी। इसे माकपा की ओर से चुनाव के मैदान से भागना समझा जा रहा था, लेकिन माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने इसका जो कारण बताया उसे जानकर सभी हैरत में पड़ गए।

उन्होंने बताया कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से हमारे कार्यकर्ता डर डर कर जीने को मजबूर हैं। राज्य में वर्तमान हालातों में उनके हिसाब से चुनाव संभव नहीं है।

लोग दहशत में हैं, बाजार अब तक नहीं खुल पाए हैं। लोग अपने जरूरतों के सामान खरीदने के लिए घरों से नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष चुनाव नहीं कराया जा सकता।

यही नहीं उन्होंने चुनाव आयोग से निवेदन भी कर किया है कि चारीलाम चुनाव को स्थिति सामान्य होने तक कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाना चाहिए।

आपको जानकारी दे दें कि त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों पर 18 फरवरी को चुनाव हुआ था , लेकिन चारीलम विधानसभा सीट पर माकपा उम्मीदवार नारायण देबबर्मा का निधन हो जाने से मतदान स्थगित कर दिया गया था।

देबबर्मा की 11 फरवरी को चुनावी अभियान के दौरान दिल का दौरा पड़ने के कारण मृत्यु हो गई थी।अब माकपा के चुनाव से हट जाने के बाद इस सीट पर भाजपा के लिए यह चुनाव एक तरफा हो गया है।

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