Wednesday , December 13 2017

तक़र्रुरात के अमल में क़्वाइद की ख़िलाफ़वर्ज़ी का उर्दू यूनीवर्सिटी ने एतराफ़ कर लिया

मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में गुज़िश्ता कई बरसों से जारी बे क़ाईदगियों और क़्वाइद की ख़िलाफ़वर्ज़ी के बारे में नए नए इन्किशाफ़ात मंज़रे आम पर आ रहे हैं। यूनीवर्सिटी के हुक्काम उन इन्किशाफ़ात की लाख तरदीद करलें लेकिन हक़ायक़ को झुटलाया नहीं जा सकता।

यूनीवर्सिटी में तक़र्रुरात, तबादलों और तरक़्क़ियों में क़्वाइद की ख़िलाफ़वर्ज़ी के इलावा अक़ुर्बा पर्वरी और इलाक़ाई असबीयत की कई मिसालें मौजूद हैं जिन की वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल से शिकायत की गई है।

मौजूदा वाइस चांसलर जिन की मीयाद 11मई को ख़त्म हो जाएगी, उन्हों ने यूनीवर्सिटीज़ की रिवायात से इन्हिराफ़ करते हुए सुबुकदोशी से ऐन क़ब्ल बड़े पैमाने पर तक़र्रुरात का अमल शुरू किया है।

इस बारे में सियासत के इन्किशाफ़ के बाद यूनीवर्सिटी ने ये एतराफ़ किया कि वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल ने 19 जुलाई 2004 को वाइस चांसलर के नाम सरकूलर जारी करते हुए ओहदा की मीयाद की तकमील से तीन माह क़ब्ल सेलेक्शन या प्रोमोशन ना करने की हिदायत दी थी।

वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल के इस सरकूलर को नजर अंदाज़ करते हुए वाइस चांसलर ने अपने ओहदा की मीयाद की तकमील से ऐन क़ब्ल बड़े पैमाने पर तक़र्रुरात के दो आलामीया जारी किए हैं। यूनीवर्सिटी ने ये वज़ाहत करने की कोशिश की कि वाइस चांसलर ने मीयाद के इख़तेताम से तीन माह क़ब्ल अमले की भर्ती का काम रोक दिया।

वाइस चांसलर ने सुबुकदोशी से क़ब्ल अपने मक़ासिद की तकमील की राह हमवार करने के लिए 2013 में 3 साल की मीयाद के लिए मुक़र्रर किए गए रजिस्ट्रार को मीयाद की तकमील से क़ब्ल ही फ़रवरी में इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया और ये तास्सुर देने की कोशिश की गई कि रजिस्ट्रार की ख़ाहिश पर उन्हें ख़िदमात से सुबुकदोश किया गया है।

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