‘दंतेवाड़ा में हुई जनसुवाई के बाद पुलिसिया उत्पीड़न आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार का असली चेहरा’ – रिहाई मंच

‘दंतेवाड़ा में हुई जनसुवाई के बाद पुलिसिया उत्पीड़न आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार का असली चेहरा’ – रिहाई मंच
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लखनऊ : रिहाई मंच ने दंतेवाड़ा के मटेनार में पीयूसीएल की जनसुनवाई के बाद पीड़ित आदिवासी जनता के उत्पीड़न को लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की सरकार की कोशिश करार दिया है।
दंतेवाड़ा में हुई जनसुनवाई में शामिल रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि जिस तरह से इस जनसुनवाई में दंतेवाड़ा, बीजापुर व आस-पास के क्षेत्रों के पीड़ितों ने माओवाद के नाम पर हो रहे जनसंहारों की हकीकत बयान की उससे बौखलाई सरकार ने इन आवाजों को कुचलने के लिए हथियार बंद दस्तों का सहारा ले रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर में इससे पहले भी सोनी सोरी, बेला भाटिया जैसे मानवाधिकारवादियों को सवाल उठाने के लिए आईजी कल्लूरी ने उनको जान से मारने की धमकी दी थी। ऐसे में पीयूसीएल की मटेनार में हुई जनसुनवाई के बाद आदिवासी नेता शुकुल प्रसाद नाग को मिल रही धमकी ने एक बार फिर से साबित किया है कि छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार के पुलिसिया राज में लोकतांत्रिक आवाजों के लिए कोई जगह नहीं है। राजीव यादव ने कहा कि जिस तरह से पुलिस संरक्षित संगठनो द्वारा बस्तर में माओवाद के नाम पर पीड़ित लोगों को कानूनी सहायता देने वालों के फोटो जारी कर रही है उससे साबित होता है कि ये पुलिस के निशाने पर हैं। उन्होंने मांग की कि दंतेवाड़ा में हुई जनसुनवाई में शामिल पीड़ितों, आयोजकों व बस्तर में कानूनी सहायता देने वालों की सुरक्षा की गारंटी की जाए।

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