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दक्कनी तहज़ीब मुग़ल कल्चर से किसी भी तरह कमतर नहीं

हैदराबाद । ३० मार्च : दक्कनी तहज़ीब किसी भी तरह मुग़्लिया सक़ाफ़्त से कमतर नहीं है। दक्कन के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों जैसे अहमद नगर बीजापूर गोलकुंडा की सक़ाफ़्त पर माक़ूल तवज्जा ना देने की वजह से उसे कमतर समझा जाता रहा है। इन ख़्यालात

हैदराबाद । ३० मार्च : दक्कनी तहज़ीब किसी भी तरह मुग़्लिया सक़ाफ़्त से कमतर नहीं है। दक्कन के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों जैसे अहमद नगर बीजापूर गोलकुंडा की सक़ाफ़्त पर माक़ूल तवज्जा ना देने की वजह से उसे कमतर समझा जाता रहा है। इन ख़्यालात का इज़हार मुमताज़ फ़नकार-ओ-मुसव्विर पद्मश्री जगदीश मित्तल ने मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में मुजव्वज़ा मर्कज़ बराए मुताला त-ए-दक्कन के अग़राज़-ओ-मक़ासिद और दायरा कार के ताय्युन केलिए मुनाक़िदा तबादला-ए-ख़्याल इजलास में बहैसीयत मेहमान-ए-ख़ुसूसी ख़िताब करते हुए किया। सदारत प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां वाइस चांसलर ने की।

जनाब जगदीश मित्तल ने कहा कि मुजव्वज़ा मर्कज़ में दक्कनी कुतुब की एक लाइब्रेरी और हैरीटेज फाऊंडेशन क़ायम किया जाना चाहिए। प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां नेसदारती तक़रीर में कहा कि मर्कज़ बराए मुताला त-ए-दक्कनपहले ही से मौजूद इस तरह के मराकज़ से मिल कर काम करेगा। उन्हों ने कहा कि मुजव्वज़ा मर्कज़ बराए मुतालआत दक्कन के मुताल्लिक़ माहिरीन सही राय पेश कर सकें इस के लिए समीनार के बजाय मुंतख़ब अफ़राद को ही मुबाहिसे की दावत दी गई।

प्रोफ़ैसर अबदुलसत्तार दलवी ने मुबाहिसा के मौज़ू पर रोशनी डालते हुए कहा कि दक्कनी तारीख़ में गोलकुंडा को मर्कज़ीयत हासिल ही। क़ुतुब शाही दौर में काफ़ी तामीरात हुईं। दकनयात के लिए एक तहक़ीक़ी मर्कज़ कीअशद ज़रूरत है जिस में माहिरीन दक्कनी ज़बान के साथ फ़ारसी-ओ-अरबी के असातिज़ा और माहिरीन लिसानियात और इसी तरह तारीख़ दानों कुतबा शनासों और मख़तूता शनासों की ज़रूरत होगी। सहाफ़ी जनाब मीर अय्यूब अली ख़ान ने कलीदी ख़ुतबा में कहा कि यूनीवर्सिटी में वसाइल और मालिया का मसला नहीं ही। इस के इलावा यूनीवर्सिटी में शोबा-ए-उर्दू उर्दू मर्कज़ और तारीख़ के असातिज़ा मौजूद हैं।

जो दक्कनी मराकज़ से तआवुनकरसकते हैं। उन्हों ने हैदराबाद में मौजूद क़दीम तरीन तामीरात के हवाले से कहा कि हैदराबाद को अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के हैरीटेज सिटी का दर्जा मिलना चाआई। इस सिलसिले मेंमुजव्वज़ा सैंटर अहम रोल अदा करसकता ही। इफ़्तिताही इजलास का आग़ाज़ क़ारी मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन निज़ामी की क़रणत कलाम पाक और तर्जुमानी से हुआ। इबतदा-ए-में डाक्टर नसीम उद्दीन फ़रीस को ऑर्डिनेटर इजलास-ओ-सदर शोबा-ए-उर्दू ने ख़ैर मुक़द्दमकिया मुक़र्ररीन के तआरुफ़ पेश किए और कार्रवाई चलाई। जनाब आबिद अबदुलवासे पब्लिक रेलेशन्ज़ ऑफीसर ने शुक्रिया अदा किया।

इफ़्तिताही इजलास के बाद मुबाहिसे काइनइक़ाद अमल में आया जिस की सदारत प्रोफ़ैसर सुलेमान सिद्दीक़ी प्रोफ़ैसर आज़ाद चेयर ने की।

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