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दक्षिण चीन सागर बना युद्ध का मैदान, धमकियों का दौर शुरु

इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के ऐतिहासिक अधिकार की बात खारिज कर दी है, जिससे वहां जंग के हालात हो गए हैं। भविष्य के इस जंग की इमकानात की शुरुआत तो चीन ने फैसला न मानने के साथ ही कर दी थी औऱ उसके साथ ही ताइवान ने अपने युद्धपोत को साउथ चाइना सी में रवाना कर आग में घी डालने का काम कर दिया है।

अमरीका ने भी चीन को फैसला मानने की चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन की फैसला मानने में ही भलाई है और उन्हें भड़काऊ बयान देने से पहले समझना चाहिए। इसके अलावा अमरीका ने चीन को सलाह दी कि वह भारत से सीख ले कि किस तरह उसने इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले को मानते हुए बांग्लादेश से अपना विवाद सुलझाया था।
इस फैसले के बाद जापान और द.कोरिया ने अपना सैन्य अभ्यास शुरु कर इन अटकलों को ओर ज्यादा बल दे दिया है। जापान ने कहा है कि चीन को कोर्ट का फैसल का इज्ज़त के साथ मानना चाहिए।

इन सबके बीच चीन ने युद्ध की धमकी देते हुए कहा है कि हम इस फैसले को नहीं मानते। उन्होंने चेतावनी दी है कि साउथ चाइना सी को युद्ध का मैदान न बनाया जाए। चीन ने कोर्ट के जजों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चीन उम्मीद करता है कि दूसरे देश उस मौके को चीन को धमकाने के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे। साथ ही सभी देश साउथ चाइना सी इलाके में अमन और स्थिरता को बनाए रखने में चीन के साथ काम करेंगे, न कि इस जगह को जंग की वजह बनाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि फैसला एकतरफा था, क्योंकि कोर्ट के चार जज जापानी जज द्वारा अप्वॉइंट किए गए थे। वहीं, पांच जजों में एक अफ्रीकी और चार जज यूरोप से हैं। उन्हें एशिया की हिस्ट्री और कल्चर के बारे में क्या पता होगा?

गौरतलब है कि साउथ चाइना में दो बड़े द्विपसमूह स्प्रातली और पारासेल को लेकर चीन और अन्य देशों के बीच तनाव है। पारासेल द्विपसमूह पर 1974 तक चीन के साथ ही वियतनाम का भी कब्जा था पर इन दोनों के देशों के बीच लड़ाई हो गई, जिसमें वियतनाम के 14 सैनिक मारे गए और चीन ने इस पूरे द्विप पर कब्जा कर लिया। स्प्रीतली द्विप को लेकर चीन, वियतनाम, मलेशिया,फिलीपींस और ब्रुनेई के बीच विवाद चल रहा है।

साउथ चाइना सी का लगभग 35 लाख स्क्वेयर किलोमीटर का एरिया विवादित है। साउथ चाइना सी में तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं। अमरीका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है। इस वजह से ये देश इस पर अपना अपना दावा कर रहे हैं। चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया। अमरीका और चीन एक दूसरे पर इस क्षेत्र को ‘मिलिटराइजेशन’ (सैन्यीकरण) करने का आरोप लगाते रहे हैं।

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