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दरबार नबवीऐ की हाज़िरी , गुनाहों की बख़शिश का ज़रीया , हाफ़िज़ मुहम्मद साबिर पाशाह कादरी

हैदराबाद ।१‍८ । सितंबर : ( रास्त ) : हज का सफ़र बड़ा मुक़द्दस सफ़र है क्यों कि ये दीन इस्लाम के अहम रुकन की अदायगी का ज़रीया है इस लिए ये सफ़र ख़ालिस रज़ाए अलहि की नीयत से होना चाहीए । रिया और दिखावा बिलकुल नहीं होना चाहिए । हज का इरादा क

हैदराबाद ।१‍८ । सितंबर : ( रास्त ) : हज का सफ़र बड़ा मुक़द्दस सफ़र है क्यों कि ये दीन इस्लाम के अहम रुकन की अदायगी का ज़रीया है इस लिए ये सफ़र ख़ालिस रज़ाए अलहि की नीयत से होना चाहीए । रिया और दिखावा बिलकुल नहीं होना चाहिए । हज का इरादा करते ही पहले तौबा करनी चाहिए ।

इन ख़्यालात का इज़हार कलीता अलबनीन जामाता इल्मो मनात मुग़ल पूरा मैं मुनाक़िदा दीनी इजतिमा बराए दरस फ़िक़्ह-ओ-फ़िक़ही शरई मसाइल के दौरान हाफ़िज़ मुहम्मद साबिर पाशाह कादरी ने किया जिस की निगरानी मौलाना मुहम्मद मस्तान अली कादरी ने की ।

उन्हों ने कहा कि मुक़द्दस घर ख़ाना काअबा में हज या उमरा की सआदत हासिल करने के बाद मदीना मुनव्वरा की हाज़िरी दीन-ओ-दुनिया की फ़लाह-ओ-सआदत का मूजिब है । क़ुरआन मजीद में बारगाह रिसालत मआबकी हाज़िरी को गुनाहों की बख़शिश-ओ-मग़फ़िरत का ज़रीया क़रार दिया गया है ।।

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