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दलितों के भारत बंद के दौरान हिंसा, मध्य प्रदेश में 5 सहित सात लोगों की मौत

कानून में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में देश के ज्यादातर क्षेत्रों में हिंसा भड़की हुई है। दलित संगठनों के भारत बंद प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। सुबह से जारी विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई में अभी तक 7 लोग जान गंवा चुके हैं। मध्य प्रदेश में 5, राजस्थान में एक और उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से भी एक शख्स की मौत की खबर है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारत बंद का खासा प्रभाव देखने को मिला है। मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाते हुए पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। राजस्थान के बाड़मेर और मध्य प्रदेश के भिंड में दो गुटों में हुई झड़प में करीब 30 लोग जख्मी हुए हैं।

बाड़मेर में कई वाहनों में आग लगाई गई है। पंजाब, बिहार, और ओडिशा में भी बंद का व्यापक असर है। यहां प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ रेल यातायात को प्रभावित किया है बल्कि सड़क जाम कर परिवहन व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है। बढ़ती हिंसा को देखते हुए एहतियातन देश भर के कई जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया गया है।

मुजफ्फरनगर में प्रदर्शनकारियों ने कई वाहन फूंक दिए और मंडी थाने पर पथराव कर दिया जिसमें चार सिपाही घायल हो गए। उग्र प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यहां 50 राउंड हवाई फायरिंग भी की गई।

दलित संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पहले की तरह लागू किया जाए।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज बताया कि केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में किसी तरह की सांप्रदायिक हिंसा को अंजाम न दिया जाए।

राजनाथ ने उन आरोपों को भी निराधार बताया जिनमें राजग सरकार के पिछड़े समुदायों के उत्थान के खिलाफ होने की बात कही गई थी। सिंह ने पत्रकारों से कहा, यह सुनिश्चित करना राजनीतिक पार्टियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि कहीं भी कोई जातीय या सांप्रदायिक हिंसा न हो।

भारत बंद के दौरान आज प्रदर्शनकारी कई जगह रेल की पटरियों पर बैठ गए जिससे करीब 100 ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित हुईं। अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर सेवाएं बहाल कर ली गयी हैं। प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में रेल और सड़क यातायात को जाम कर दिया तथा हिंसा भी की।

सप्त क्रांति एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, भुवनेश्वर और रांची राजधानी, कानपुर शताब्दी को गाजियाबाद से पहले मेरठ और मोदीनगर में ही रोक दिया गया। कई मालगाड़ियों को भी रोका गया।

आगरा रेल मंडल पर एक शताब्दी और गतिमान एक्सप्रेस सहित 28 ट्रेनें देरी से चलीं। प्रदर्शनकारियरों के कारण पूर्व मध्य रेलवे की करीब 43 ट्रेनें प्रभावित हुई क्योंकि वे सुबह पांच बजकर 10 मिनट पर ही धनबाद रेल मंडल पर पहुंच गए थे। उत्तर पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और उत्तर पूर्व फ्रंटियर रेलवे में करीब 18 ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई।

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