दलितों के साथ खाने और नहाने से कुछ नहीं होगा, समानता चाहिए दया नहीं- बीजेपी दलित नेता

दलितों के साथ खाने और नहाने से कुछ नहीं होगा, समानता चाहिए दया नहीं- बीजेपी दलित नेता
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एक तरफ भाजपा उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दलितों को अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुटी है। दूसरी तरफ पार्टी की अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रमुख संजय पासवान ने पार्टी नेताओं के दलितों के साथ “खाने-नहाने” पर आपत्ति जताई है। उन्‍होंने कहा कि संगठन को दलित समुदाय के लोगों के साथ बैठने, खाने और मिलने के ‘प्रतीकवाद’ से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि वे ‘समानता’ चाहते हैं, दया नहीं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दलित साधुओं के साथ बहु प्रचारित ‘कुम्भ स्नान’ और उत्तर प्रदेश में उस समुदाय के लोगों के साथ भोजन ग्रहण करने की एक तरह से आलोचना करते हुए पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य संजय पासवान ने इन्हें अदूरदर्शी कवायद करार दिया जो दलितों को चिढ़ाने का काम करते हैं क्योंकि ऐसे मुद्दे अब उनके लिए प्रसांगिक नहीं रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को दलितों के मसीहा बी आर अंबेदकर को सम्मानित करने से आगे बढ़ना चाहिए और अगर पार्टी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में दलितों के बीच अपनी पैंठ बढ़ाना चाहती है तब उसे बसपा के संस्थापक कांशी राम और पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम के योगदान को स्वीकार करना चाहिए।

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