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दसहरा के बाद मुख़्तलिफ़ सरकारी मह्कमाजात में तक़र्रुरात का इमकान

रियासत की तक़सीम के बाद से सरकारी मुलाज़मतों में तक़र्रुरात का सिलसिला मुकम्मल तौर पर बंद है लेकिन हुकूमत तेलंगाना की जानिब से इमकान है कि दसहरा के फ़ौरी बाद मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात में मौजूद मख़लुआ जायदादों पर तक़र्रुरात के लिए आलामीया

रियासत की तक़सीम के बाद से सरकारी मुलाज़मतों में तक़र्रुरात का सिलसिला मुकम्मल तौर पर बंद है लेकिन हुकूमत तेलंगाना की जानिब से इमकान है कि दसहरा के फ़ौरी बाद मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात में मौजूद मख़लुआ जायदादों पर तक़र्रुरात के लिए आलामीया जारी कर दिया जाएगा। इलावा अज़ीं हुकूमत तेलंगाना फ़ौरी तौर पर तेलंगाना स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के क़ियाम के मुताल्लिक़ भी संजीदा कोशिशों में मसरूफ़ है।

ज़राए से मौसूला इत्तिलाआत के बामूजिब दसहरा तेहवार के इख़तेताम के बाद चीफ मिनिस्टर तेलंगाना मिस्टर के चंद्रशेखर राव इस सिलसिले में अपने काबीनी रफ़्क़ा से मुशावरत के फ़ौरी बाद तेलंगाना स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के क़ियाम का एलान कर सकते हैं और जल्द अज़ जल्द कमीशन के क़ियाम से मुताल्लिक़ आलामीया जारी किया जा सकता है।

हुकूमत तेलंगाना की जानिब से तक़र्रुरात की सूरत में फ़िलहाल रियासत तेलंगाना में मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात में 98016 जायदादें मख़लुआ हैं, जिन पर तक़र्रुरात के लिए आलामीया जारी हो सकता है। मौजूदा मख़लुआ जायदादों को 4 फ़ीसद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात पर अमल आवरी के ज़रीए ही अगर पुर किया जाए तो उसी सूरत में तकरीबन 4,000 मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात के मुताबिक़ सरकारी मुलाज़मतें हासिल हो सकती हैं।

मुस्लिम नौजवानों और सरपरस्तों को इस सिलसिले में तैयार रहने की ज़रूरत है ताकि सरकारी तौर पर आलामीया की इजराई के साथ ही वो सरकारी मुलाज़मतों के हुसूल के लिए तरीकेकार के मुताबिक़ रुजू हो सकते हैं।

बताया जाता है कि तेलंगाना स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के क़ियाम के ज़रीए ग्रुप I, ग्रुप II के इलावा ग्रुप IV के मुलाज़मीन के तक़र्रुरात के सिलसिले में आलामीया की इजराई के मुताल्लिक़ महकमाजाती असास पर तफ़सीलात के हुसूल के सिलसिले में मुरासलत का सिलसिला जारी है।

ज़राए से मौसूला इत्तिलाआत के बामूजिब 98,016 मख़लुआ जायदादों में ज़ायदाज़ 50,000 जायदादों पर रास्त तक़र्रुरात अमल में लाए जाएंगे क्यूंकि माबकी जायदादों पर कंट्रैक्ट की असास पर ख़िदमत अंजाम देने वाले मुलाज़मीन को मौक़ा फ़राहम किए जाने का इमकान है। इलावा अज़ीं आम ज़ुमरे की जायदादों में भी मुस्लिम नौजवान कम्पेटेटिव बुनियादों पर तक़र्रुर हासिल कर सकते हैं।

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