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दस बच्चे पैदा करना माने कैंसर

फिनलैंड के मुहक़्क़िक़ीन ने फिनलैंड की कम-ओ-बेश 5000 ऐसी ख्वातीन का तिब्बी तजज़िया किया जिन्हों ने 2010 से पहले एक दो बार नहीं बल्कि 10 बार बच्चों को जन्म दिया यानी वो दस बार ज़चगी के अमल से गुज़रीं।

फिनलैंड के मुहक़्क़िक़ीन ने फिनलैंड की कम-ओ-बेश 5000 ऐसी ख्वातीन का तिब्बी तजज़िया किया जिन्हों ने 2010 से पहले एक दो बार नहीं बल्कि 10 बार बच्चों को जन्म दिया यानी वो दस बार ज़चगी के अमल से गुज़रीं।

मुहक़्क़िक़ीन का कहना है कि ऐसी ख्वातीन जो 10 से या इससे ज़्यादा बच्चों की माँ होती हैं, उन्हें कैंसर जैसी मूज़ी बीमारी लाहक़ होने का कोई ख़दशा नहीं होता। स्टडी करने वाले मुहक़्क़िक़ डाक्टर जोहात्पानायणन ने कहा कि ऐसी ख्वातीन जिन्होंने 10 या इस ज़्यादा बच्चों को जन्म दिया वो फिनलैंड की औसत ख्वातीन के मुक़ाबले पाँच साल ज़ाइद जवान थीं।

उन्होंने कहा कि ये बात भी अपनी जगह सही है कि नौजवानी में (0 ता 22 साल) हामिला होने वाली ख्वातीन को पिस्तानों के कैंसर का ख़दशा भी नहीं होता। तहक़ीक़ में इस बात का भी जायज़ा लिया गया कि माने हमल इक़दामात से भी रहम के कैंसर का ख़दशा कम होजाता है। यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि दीन फ़ित्रत यानी इस्लाम में भी पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने ऐसी ख्वातीन को तर्जीह देने की बात कही है जो ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे पैदा करसकती हों।

आप इस‌का मतलब सिर्फ़ आबादी में इज़ाफ़ा यानी मुस्लमानों की तादाद में इज़ाफ़ा ही नहीं बल्कि ये बात भी पेशे नज़र थी कि ऐसी ख्वातीन दीगर ख्वातीन (कम बच्चे पैदा करनेवाली या बांझ) के मुक़ाबले ज़्यादा सहतमंदि होती हैं। इस तरह पिस्तानों के कैंसर, आम कैंसर, रहम के कैंसर, जिल्द का कैंसर और थायराइड के कैंसर इन ख्वातीन को लाहक़ नहीं होते जो ज़ाइद बच्चे पैदा करती हैं। यानी वो बहुत ज़्यादा ज़रख़ेज़ होती हैं।

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