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दहशतगर्दी मुक़द्दमात का जायज़ा लेने टास्क फ़ोर्स के क़ियाम की तजवीज़

नई दिल्ली, 13 जुलाई:(पी टी आई)मुसलमानों के इस एहसास को कुबूल करते हुए कि उन्हें खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है वज़ारत इकलेती उमूर की जानिब से जल्दी ही एक ख़ुसूसी टास्क फ़ोर्स की तशकील की तजवीज़ पेश की जाएगी ताकि मुसलमानों के ख़िलाफ़ दह

नई दिल्ली, 13 जुलाई:(पी टी आई)मुसलमानों के इस एहसास को कुबूल करते हुए कि उन्हें खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है वज़ारत इकलेती उमूर की जानिब से जल्दी ही एक ख़ुसूसी टास्क फ़ोर्स की तशकील की तजवीज़ पेश की जाएगी ताकि मुसलमानों के ख़िलाफ़ दहशतगर्दी के मुक़द्दमात का जायज़ा लिया जा सके ।

वज़ीर इकलेती उमूर के रहमान ख़ान ने पी टी आई से बात चीत करते हुए कहा कि मुसलमान ये मानते हैं कि उनके नौजवानों को गिरफ़्तार तो किया जाता है और कई बरस तक मुक़द्दमा नहीं चलाये जाता । ये एहसास आम है कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है ।

ये दलील पेश करते हुए कि आवाम को किसी सुबूत-ओ-शवाहिद के बगैर गिरफ़्तार नहीं किया जाना चाहीए रहमान ख़ान ने कहा कि बिरादरी में ये शदीद एहसास है कि उन से नाइंसाफ़ी की जा रही है और हम इस से बच नहीं सकते । उन्होंने कहा कि वो बहुत जल्द एक तजवीज़ हुकूमत को पेश करेंगे ताकि एक टास्क फ़ोर्स तशकील दी जा सके ।

उन्होंने कहा कि वो एक टास्क फ़ोर्स क़ायम करने की तजवीज़ हुकूमत को रवाना करेंगे । इस टास्क फ़ोर्स को ये इख़्तेयारात होने चाहिऐं कि वो इन ( दहश्तगर्दी के ) मुक़द्दमात का जायज़ा ले सके । वज़ीर मौसूफ़ ने कहा कि गिरफ़्तारी के बाद इन बेशतर नौजवानों को पाँच साल , सात साल , दस साल बाद रिहा कर दिया जाता है ताहम इससे उनकी ज़िंदगी तबाह हो जाती है ।

उन्होंने कहा कि दहशतगर्दी के मुक़द्दमात की सुनवाई में ताख़ीर दर असल शहरियों को उनके बुनियादी हुक़ूक़ से महरूम करने के मुतरादिफ़ है । एक तवील अर्सा जेल की सलाखों के पीछे गुज़ारने से उनकी ज़िंदगियां तबाह हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि ये भी एक हक़ीक़त है कि दहशतगर्दी मौजूद है ।

इस लानत को ख़त्म करने मुसलमानों के बिशमोल हर एक की ज़िम्मेदारी है । रहमान ख़ान ने कहा कि वो हुकूमत से कहेंगे कि वो मुसलमानों को दरपेश मसाइल से निमटने के लिए एतेदाल पसंद मुस्लिम क़ायदीन की ख़िदमात हासिल करे । उन्होंने कहा कि बर्तानिया में भी यही तरीका कार इख़तियार किया गया है और दहशतगर्दी से निपटने के लिए मुसलमान बिरादरी के ही क़ाइदीन से तआवुन लिया जा रहा है ।

वो हकूमत-ए-हिन्द से भी कहेंगे कि वो भी इसी तरह का तरीका कार इख्तेयार करे । वज़ीर मौसूफ़ ने बताया कि उन्होंने वज़ीर ए दाख़िला सुशील कुमार शिंदे को मकतूब रवाना करते हुए दहशतगर्दी के मुक़द्दमात की सुनवाई में ग़ैरमामूली ताख़ीर पर मुसलमानों में पाई जाने वाली बे चीनी के ताल्लुक़ से उन्हें वाक़िफ़ करवाया है और शिंदे ने उन्हें इस ताल्लुक़ से मुसबत इक़दामात करने का तयक्कुन दिया है ।

रहमान ख़ान ने कहा कि इस तरह के मुक़द्दमात की तेज़ रफ़्तार समाअत के लिए ख़ुसूसी अदालतें क़ायम की जानी चाहिऐं। उन्होंने कहा कि ये तास्सुर दिया जाता है कि जहां कहीं धमाके होते हैं इन में मुसलमान मुलव्वस रहते हैं लेकिन इस तास्सुर का कोई सुबूत नहीं मिलता ।

उन्होंने कहा कि बेशतर मुश्तबा मुल्ज़िमीन को जल्द यह देर से रिहाई मिल जाती है । उन्होंने कहा कि ये तास्सुर भी ग़लत है कि मजलिस के रुकन असेम्बली अकबर ओवैसी को इश्तेआल अंगेज़ तक़रीर पर गिरफ़्तार किया गया था और उन के बाद इश्तेआल अंगेज़ तक़रीर करने वाले वे एच पी लीडर प्रवीण तोगाड़िया के साथ नरम रवैय्या इख्तेयार किया गया ।

उन्होंने कहा कि अगर हिंदुत्तवा क़ाइदीन के ख़िलाफ़ भी इश्तेआल अंगेज़ तक़ारीर के सुबूत-ओ-शवाहिद मिलते हैं तो उन्हें भी गिरफ़्तार किया जाना चाहीए । वो नहीं जानते कि तोगाड़िया ने क्या कहा है लेकिन अगर उन्होंने भी इश्तेआल अंगेज़ी की है तो उन्हें भी गिरफ़्तार किया जाना चाहीए ।

रहमान ख़ान ने कहा कि तालीमी पसमांदगी मुसलमानों का सब से बड़ा मसला और चैलेंज है और यू पी ए हुकूमत उनकी तालीमी पसमांदगी को दूर करने के लिए कई प्रोग्राम्स पर अमल कर रही है ।

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