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दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ख़वातीन की शमूलियत

पनाजी: वज़ीर-ए-दिफ़ा मनोहर पारीकर ने बताया कि फ़ौज की इन्सिदाद-ए-दहशतगर्दी कार्यवाईयों में ख़वातीन को भी ज़िम्मेदारी (रोल) देने के हक़ में हैं। उन्होंने बताया कि वो उसूली तौर पर दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ख़वातीन को शामिल करने के हक़ में हैं ताहम क़तई फ़ैसला करने में ताख़ीर हो सकती है।

एक सवाल के जवाब में वज़ीर-ए-दिफ़ा ने कहा कि मैं समझता हूँ कि हर एक शोबा में ख़वातीन को भी मुसावी हिस्सेदार बनाया जाये। क़ब्लअज़ीं एय‌र चीफ़ मार्शल अरूप राहा ने कहा था कि महैज़-ए-जंग पर ख़ातून पायलेटस को रवाना करने की तजवीज़ है और जंगी तय्यारे उड़ाने के लिए उन्हें ख़ुसूसी तर्बीयत दी जाएगी जिस पर वज़ीर-ए-दिफ़ा ने कहा कि ये काम मरहला वार होगा।

जंगी तय्यारों के बीड़ा में ख़ातून पायलेटस की शमूलियत के लिए कुछ वक़्त दरकार होगा। उन्होंने ये मिसाल पेश की कि मुत्तहदा अरब इमारात के एयरफ़ोर्स में ख़ातून पायलेटस शामिल किया गया है जो कि आई एस आई एसके निशानों पर कामयाबी के साथ हमले कर रहे हैं।

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