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दाअश‌ के ठिकानों पर ईरानी तय्यारों की बमबारी

ईरानी फ़िज़ाईया ने इराक़ और शाम की हुदूद में दौलत इस्लामी इराक़-ओ-शाम दाअश के मुतअद्दिद ठिकानों पर मज़ीद हमले किए हैं। इराक़ी मीडिया के मुताबिक़ गुज़िशता चंद दिनों के दौरान इराक़ और शाम में दाअश के ठिकानों पर फ़िज़ाई हमलों में इराक़ी वज़ीर-

ईरानी फ़िज़ाईया ने इराक़ और शाम की हुदूद में दौलत इस्लामी इराक़-ओ-शाम दाअश के मुतअद्दिद ठिकानों पर मज़ीद हमले किए हैं। इराक़ी मीडिया के मुताबिक़ गुज़िशता चंद दिनों के दौरान इराक़ और शाम में दाअश के ठिकानों पर फ़िज़ाई हमलों में इराक़ी वज़ीर-ए-आज़म नूरी अलमालिकी के जंगी तय्यारों ने भी हिस्सा लिया।

ताहम इन तय्यारों के पायलेट मुक़ामी नहीं बल्कि ईरानी थे जो नूरी अलमालिकी के दिफ़ा में लड़ाई के लिए इराक़ भेजे गए हैं। बरसल्ज़ में एक मग़रिबी सिफ़ारती ज़रिये ने ख़बरदार किया है कि इराक़ में पड़ोसी मुल्कों की फ़ौजी मुदाख़िलत ना सिर्फ़ मसले को मज़ीद पेचीदा बनाने का मूजिब बनेगी बल्कि बैरूनी मुदाख़िलत दाअश को अपने पंजे मज़ीद फैलाने का मौक़ा फ़राहम करेगी।

मग़रिबी ममालिक की जानिब से इंतिबाह के अली अलर्रग़्म ईरान, नूरी अलमालिकी की हिमायत में बाग़ीयों के ख़िलाफ़ फ़िज़ाई हमले जारी रखे हुए है। ज़राए का कहना है कि “दाअश” के मुबय्यना ठिकानों पर हमलों के लिए जंगी तय्यारे दोनों मुल्कों की सरहदों के क़रीब वाक़्य ईरानी शहरों या शाम के फ़ौजी अड्डों से उड़ानें भरते हैं। लंदन से शाय होने वाले अख़बार ने रिपोर्ट किया है कि रूस से हासिल करदा “सुखोई” जंगी तय्यारों को अभी तक बाग़ियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं किया गया।

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