Monday , December 18 2017

दाइश के ख़िलाफ़ पालिसीयां नाकाम, मग़रिबी रहनुमा बेचैन

इस्लामिक स्टेट या दाइश के ख़िलाफ़ अपनी पालिसीयों की नाकामी, मशरिक़े वुस्ता में मुसलसल खूँरेज़ तनाज़आत और बोहरानी ख़ित्तों से मुताल्लिक़ रूसी मौक़िफ़ के मुसलसल बुलंद आवाज़ होते जाने पर मग़रिबी मुल्कों के रहनुमाओं को स्ट्रेटेजिक बेचैनी का सामना है।

इन अवामिल के इलावा मग़रिबी दुनिया के रहनुमाओं को इस बात पर भी बहुत तशवीश है कि आलमी मंडीयों में ख़ाम तेल की क़ीमतें ताहाल अपनी परेशानकुन हद तक कम सतह पर हैं जबकि चीनी मईशत में तरक़्क़ी का अमल भी अभी तक सुस्त रवी का शिकार है।

एक बर्तानवी थिंक टैंक के मुताबिक़ इस वक़्त आलमी सतह पर जो सिक्यूरिटी माहौल पाया जाता है, इस की ख़ास बात वो स्ट्रेटेजिक बेचैनी है, जिसका मग़रिबी दुनिया के लीडरों को सामना है।

इंटरनेशनल इंस्टीटियूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज IISS के सालाना जायज़े के मुताबिक़ मग़रिबी दुनिया के सरब्राहाने ममुल्कत और हुकूमत को इस बेचैनी का सामना जिन चैलेंजेस की वजह से है, उनकी बुनियाद इन रहनुमाओं की ये सोच है कि उमूमी नज़्मो ज़ब्त बेहतर हुक्मरानी का नतीजा होना चाहिए।

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