दावत-ओ-तब्लीग़ के काम में ग़फ़लत ना बरतने की तलक़ीन

दावत-ओ-तब्लीग़ के काम में ग़फ़लत ना बरतने की तलक़ीन
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हैदराबाद 24 नवंबर: अल्लाह ने उम्मत मुहम्मदिया पर दावते दीन की भारी ज़िम्मेदारी आइद की है, इस ज़िम्मेदारी को पूरी करना मुसलमानों का फ़रीज़ा है। दावते दीन की मेहनत और तब्लीग़ का काम ना सिर्फ इस्लाम की सर-बुलंदी का बाइस है बल्कि इस काम को अंजाम देने वाले तकब्बुर जैसी लानत से महफ़ूज़ होने लगते हैं चूँकि दावत के लिए गशत वग़ैरा से तकब्बुर में नुमायां कमी वाक़्ये होती है।

मौलाना क़ासिम क़ुरैशी ने इजतेमा के आख़िरी दिन दुआ से पहले अपने मुख़्तसर ख़िताब के दौरान इन ख़्यालात का इज़हार किया। उन्होंने बताया कि जब मुस्लमान दावत का काम शुरू करते हैं तो ये नहीं देखा जाता कि वो कौन है बल्कि देखा ये जाना चाहीए कि जो भी दावते दीन का काम कर रहे हैं, वो किस हद तक संजीदगी से सरगर्म अमल है।

उन्होंने बताया कि दीन की मेहनत करने वालों से अल्लाह राज़ी होते हैं और अल्लाह की रज़ा के लिए हमें दुनिया के हर ख़ित्ता में दीन इस्लाम के पर्चम को बुलंद करने की ज़रूरत है। उन्होंने सहि रोज़ा इजतेमा के आख़िरी लमहात में किए गए अपने ख़िताब के दौरान शुरका को हिदायत दि के वो सब्र-ओ-तहम्मुल के साथ उन पर आइद की गई ज़िम्मेदारी को पूरा करें , इस में किसी किस्म की कोताही ना करें।

मौलाना क़ासिम क़ुरैशी ने कहा कि इस इजतेमा में ख़ाह कितने ही लोग क्युं ना आए हूँ लेकिन जब ये अमली तौर पर दावत के काम से वाबस्ता होंगे तो यक़ीनन दुनिया का कोई हिस्सा नहीं बचेगा जहां दीन की दावत नहीं पहुँचेगी। ख़िताब के बाद मौलाना ने दुआ की और इस ख़ुसूसी दुआ में शिरकत के लिए शहर के मुख़्तलिफ़ मुक़ामात से लोग इजतेमा गाह का रुख कर रहे थे। डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मुहम्मद महमूद अली भी यहां मौजूद थे और उन्होंने ज़ाइद अज़ तीन घंटे इजतेमा गाह में गुज़ारे।

शहर के दूर दराज़ मुक़ामात से भी दुआ में शिरकत के लिए अवाम की बड़ी तादाद इजतेमा गाह पहुंची थी, मौलाना क़ासिम क़ुरैशी ने इस्लाम की सर-बुलंदी उम्मत की बहबूद के अलावा दुसरे दुआएं की।

हज़रत मौलाना ने इस मौके पर की गई दुआ में मुल्क-ओ-मिल्लत और शुरका के मुआवनीन से इज़हार-ए-तशक्कुर करते हुए कहा कि जब कभी एसे प्रोग्राम होते हैं तो कुछ बदनज़मी होती हैं, मगर यहां एसा कुछ ना होने पर ये कहा जा सकता हैके ज़िम्मेदारान जमात के अलावा अवाम-ओ-ख़वास ने भी नज़म-ओ-ज़बत की काफ़ी बेहतर सूरत-ए-हाल को यक़ीनी बनाने की कोशिश की।

सहि रोज़ा तब्लीग़ी इजतेमा के इख़तेताम से पहले मुख़्तलिफ़ इलाक़ों में गशत का काम अंजाम देने वाली छोटी जमातों के अलावा बैरूनी रियासत का सफ़र करने वाली जमातों के लिए ख़ुसूसी दुआ करते हुए अल्लाह से मदद मांगी और कहा कि ये जो कुछ करने जा रहे हैं , वो सिर्फ और सिर्फ तेरी रज़ा के लिए है। ख़ुसूसी दुआ के मौके पर डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मुहम्मद महमूद अली , मौलाना मुर्सलीन , मौलाना असलम नागपुरी, सय्यद साजिद पीरज़ादा , हाफ़िज़ मुहम्मद फ़य्याज़ अली के अलावा दुसरे मौजूद थे।इजतेमा के इख़तेताम के साथ ही ज़ाइद अज़ तीन घंटे शाहीननगर से चंदरायनगुट्टा बराह बारकस पहुंचने वाली सड़क पर ट्रैफ़िक जाम रही।

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