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दाख़िली सलामती बड़ा चैलेंज पुलिस को बेहतर रोल अदा करने की ज़रूरत

हैदराबाद 01 नवंबर:हिन्दुस्तान के लिए दाख़िली सलामती एक चैलेंज है और आने वाले दिनों में पुलिस को अपना रोल बेहतर बनाना होगा । क़ौमी सलामती मुशीर ए के डोवल ने 67 इंडियन पुलिस सर्विस ओहदेदारों की पासिंग आउट परेड के मौके पर ख़िताब करते हुए कहा के बग़ैर दाख़िली सलामती के मलिक आलमी ताक़त नहीं बन सकता।

उन्होंने कहा कि दुनिया में एसे कई ममालिक हैं जो दाख़िली सलामती कमज़ोर होने के सबब कई मसाइल का शिकार हो चुके हैं और आलमी जंग-ए-अज़ीम के बाद 37 मुल्क मुतास्सिर हुए जिनमें 28 दाख़िली सलामती के मसाइल से दो-चार हैं और पाकिस्तान भी इसी किस्म के मसाइल से मुतास्सिर है।

डोवल ने कहा कि मौजूदा दौर की जंग बिलकुल अलग नौईयत की है। उसे फ़ोरथ जनरेशन ( चौथी नसल ) की जंग कहा जा सकता है और ये कई पेचीदगीयों की हामिल है। ये जंग फ़ौज से नहीं लड़ी जाएगी जबकि पुलिस को इस जंग में अहम रोल अदा करना होगा चूँकि सिविल सोसाइटी इस जंग से बेहद मुतास्सिर है।

अब पुलिस को जंग लड़ना होगा और इस में कामयाबी हासिल करनी होगी। क़ौमी सलामती मुशीर ने कहा कि अब दुश्मन खुल कर वार नहीं करता बल्कि कई तरीक़े कार इख़तियार करके दाख़िली सलामती को ख़तरा पहुँचा सकता है जिससे निमटने के लिए पुलिस ओहदेदारों को चौकस रहना होगा।

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