Thursday , August 16 2018

दिल्ली इंतिख़ाबात ज़ात पात की बुनियाद पर लड़े जाऐंगे : सर्वे

आम आदमी पार्टी केलिए दिल्ली के वोटर्स को सिर्फ़ अवाम। मुवाफ़िक़ और बदउनवानियों की मुख़ालिफ़त करने वाले नारों के ज़रिया राग़िब करना बहुत मुश्किल साबित होगा क्योंकि दिल्ली के अवाम हिंदुस्तान की किसी भी रियासत के अवाम से मुख़्तलिफ़ हैं।

वो अपने हक़ राय दही के इस्तिमाल से क़बल हमेशा उम्मीदवारों की ज़ात पात और किस पार्टी से उनकी वाबस्तगी है, उस पर ज़रूर ग़ौर करते हैं। एक सर्वे के मुताबिक़ दिल्ली के कम-ओ-बेश 20 हलक़ा राय दही में मौजूद राय दहनदे उन उम्मीदवारों को तर्जीह देते हैं जिन का ताल्लुक़ ख़ुद उन की बिरादरी या ज़ात से हो जबकि दीगर उमूर उन केलिए सानवी हैसियत रखते हैं।

दिल्ली के 364 मवाज़आत के मिनजुमला 225 मवाज़आत उसे हैं जहां जाट बिरादरी का बोल बाला है जबकि 70 मवाज़आत में गुजर बिरादरी अक्सरियत में है। 35 मवाज़आत में अक्सरियत या दो तबक़ा को हासिल है। दिल्ली के आठ हलक़ों में महरौली, मुंडका, रीथाला, नांगलोई, मटियाला, नजफ़ गढ़ और बिज्जू असिन में जाट तबक़ा को फ़ैसलाकुन मौक़िफ़ हासिल है जहां जुमला राय दहनदों की तादाद में 10 फ़ीसद राय दहनदे जाट तबक़ा से ताल्लुक़ रखते हैं जबकि गुजरों का तनासुब 7 फ़ीसद, दर्ज फ़हरिस्त ज़ातों का तनासुब 17 फ़ीसद, मुस्लमानों का 12 फ़ीसद, पंजाबियों का 9 फ़ीसद, सिखों का 4 फ़ीसद और वेश तबक़ा का तनासुब 8 फ़ीसद है।

गुजर तबक़ा बदरपोर, तुगलकाबाद, संगम विहार, गोंडा, गोकुल पूरी, कर्वाल नगर और ओखला में फ़ैसलाकुन मौक़िफ़ रखता है। सर्वे में ये भी कहा गया हैकि मशरिक़ी दिल्ली के सल्लम इलाक़ों से लोटीन बंगला के पाश इलाक़ों तक ज़ात पात का पहलू एक मुनफ़रद हैसियत का हामिल होगा और इसी ज़ात पात के पहलू को मद्द-ए-नज़र रखते हुए कांग्रेस और बी जे पी ने अपने उम्मीदवारों का ताय्युन किया है और इस का सब से ज़्यादा फ़ायदा इन ही दो पार्टीयों का होगा।

कोटला मोबारकपूर भी गुजरों की अक्सरियत वाला इलाक़ा है। बी जे पी की क़ियादत वाली जुनूबी दिल्ली म्यूनसिंपल कारपोरेशन की मेयर सरीता चौधरी ने कांग्रेस पर इल्ज़ाम आइद किया कि वो सिर्फ़ वादे कररही है और ये उम्मीद‌ कररही हैकि वादों के ज़रिया इंतिख़ाबात में कामयाबी हासिल की जा सकती है जबकि हक़ीक़त ये है कि कांग्रेस ने कोई अमली कारकर्दगी नहीं दिखाई।

सरीता चौधरी अख़बारी नुमाइंदों से बात कररही थीं। उन्होंने कहा कि बदउनवानियाँ, इफ़रात-ए-ज़र और ग़ैर मजाज़ कॉलोनियां इंतिख़ाबात के अहम मुद्दे होंगे।

TOPPOPULARRECENT