Tuesday , December 12 2017

दिल्ली की तरह इस्लामाबाद और लाहौर में भी बह रही है जहरीली और दूषित हवा

इस्लामाबाद। भारत की राजधानी दिल्ली पिछले कई दिनों से के चलते चर्चा का विषय बनी हुई है, तो पाकिस्तान में भी हालात बहुत अलग नहीं हैं. हालांकि अब बरसात ने इस्लामाबाद और लाहौर में हालात कुछ बेहतर तो किये हैं लेकिन अब भी स्थिति चिंताजनक है.

लाहौर में पिछले दिनों पीएम 2.5 की मात्रा 1,000 को पार गयी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा के अनुसार चौबीस घंटे में पीएम 2.5 की मात्रा 25 से ज्यादा नहीं होनी चाहिये और लाहौर में 400 गुना तक पहुंच गयी. हालांकि बुधवार को यह कम हो कर 159 आ गयी है लेकिन इसे अभी भी सुरक्षित दर नहीं माना जा सकता.

ऐसे में पाकिस्तान एयर क्वॉलिटी ने ट्वीट किया है, “सवाल यह उठता है कि खतरनाक से अस्वस्थ के बदलाव को बेहतरी कहना चाहिये?”

भारत और चीन के बाद प्रदूषण के कारण सबसे अधिक मौतें पाकिस्तान में ही होती हैं. गेट्स फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में सालना 1,25,000 लोगों की मौत प्रदूषण के चलते होती है. वहीं आतंकवाद के कारण मरने वालों की संख्या 60,000 है.

ऐसे में विपक्ष के नेता शेरी रेहमान ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार में एक लेख लिख कर स्थिति की आलोचना की है. रेहमान ने लिखा है, “मैं आतंकवाद के खतरे को कम करके नहीं बताना चाहता लेकिन हमें यह समझना होगा कि हमारे नागरिकों को जमीन पर मौजूद आतंकवादियों की तुलना में हवा के कारण होने वाली बीमारियों से ज्यादा खतरा है.” रेहमान ने आगे लिखा है, “हमें कुछ करना होगा. और हमें अभी ही कुछ करना होगा.”

पिछले दिनों पाकिस्तान पंजाब के अस्पतालों में प्रति दिन लगभग एक हजार मरीजों का सांस से जुड़ी बीमारियों के चलते इलाज हुआ. लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई कदम नहीं लिए गये.

लाहौर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सैयद मंसूर अली शाह ने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा, “यहां आपातकालीन स्थिति बनी हुई है लेकिन अधिकारियों ने दफ्तरों में चाय पीने के अलावा और कुछ नहीं किया है.”

शाह ने यह भी पूछा, “आपने स्मॉग को ले कर रेड अलर्ट जारी क्यों नहीं किया, जब आप यह जानते हैं कि यह गर्भवती महिलाओं, वृद्ध लोगों और दिल के मरीजों की सेहत के लिए बुरा है.”

वहीं पाकिस्तान एयर क्वॉलिटी के आबिद ओमर का कहना है कि बीजिंग और दिल्ली में कम से कम हवा की गुणवत्ता को मॉनिटर किया जाता है और नागरिकों को सजग किया जाता है लेकिन पाकिस्तान में अधिकारी “अभी तक जगे ही नहीं हैं.” ओमर के अनुसार पाकिस्तान में, “पर्यावरण प्राथमिकताओं में सबसे नीचे है.”

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