Wednesday , December 13 2017

दिल्ली गैंगरेप के दरिंदो की फांसी पर सुप्रीमकोर्ट की रोक

सुप्रीमकोर्ट ने 16 दिसंबर के गैंगरेप कांड के मुल्ज़िम मुकेश और पवन की मौत की सजा के अमल पर हफ्ते के रोज़ रोक लगा दी। मामले में खाती ठहराए गए पवन गुप्ता और मुकेश ने ज़िक्र किया कि रोजाना सुनवाई के तहत वे मुंसिफाना सुनवाई से मरहूम रहे और

सुप्रीमकोर्ट ने 16 दिसंबर के गैंगरेप कांड के मुल्ज़िम मुकेश और पवन की मौत की सजा के अमल पर हफ्ते के रोज़ रोक लगा दी। मामले में खाती ठहराए गए पवन गुप्ता और मुकेश ने ज़िक्र किया कि रोजाना सुनवाई के तहत वे मुंसिफाना सुनवाई से मरहूम रहे और उन्हें प्रासीक्यूटर के मनगढंत और हकाएक के बरअक्स कहानी को कुबूल करने पर मजबूर किया गया।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की खुसूसी बेंच ने 31 मार्च तक सजा ए मौत पर रोक लगा दी। अदालत ने रजिस्ट्री को अदालती रोक के हुक्म को खबर देने कैइ हिदायत दी है । बेंच ने रजिस्ट्री को चीफ जस्टिस पी सतशिवम के सामने पेश करने के लिए कहा है ताकि वे इस मामले की सुनवाई के लिए मुनासिब बेंच के पास भेज सकें।

जस्टिस देसाई ने कहा कि,हम पवन और मुकेश की सजा पर 31 मार्च 2014 तक रोक लगाते हैं। मामले पर मुनासिब बेंच में सुनवाई के लिए रजिस्ट्रेशन करने के लिए हम रजिस्ट्री को चीफ जस्टिस के सामने पेश करने की हिदायत देते हैं। हम अदालत के रजिस्ट्री को मुताल्लिक शख्सियात और ओहदेदारों को इत्तेला करने की हिदायत देते हैं।”मुकेश और पवन की अपील पर वकील एमएल शर्मा ने पैरवी की।

मालूम रहे कि, दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 को चलती बस में पैरामेडिकल तालेबा के साथ हुए गैंगरेप मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने जुमेरात के रोज़ को चारो मुल्ज़िमो की फांसी की सजा की तस्दीक कर दी थी।

फैसला जस्टिस रेवा खेत्रपाल और जस्टिस प्रतिभा रानी की बेंच ने सुनाया। इस मामले में पिछले साल सितंबर को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार मुल्ज़िम मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को फांसी की सजा सुनाई थी। मामले का अहम मुल्ज़िम बस ड्राइवर राम सिंह ने तिहाड जेल में खुदकुशी कर ली थी।

एक नाबालिग मुल्ज़िम को जुवेनाइल बोर्ड ने तीन साल सुधार गृह में रखने का फैसला सुनाया था।दिल्ली में 23 साला फीजियोथेरेपिस्ट इंटर्न के साथ छह लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था और उसे बेहरमी से पीटा था। मुल्ज़िम लड़की और उसके दोस्त को दिसंबर की ठंड वाली रात में बरहना (Nakedness) हालत में सडक किनारे फेंककर चले गए थे।

मुतास्सिरा लड़की को आंत में सख्त चोटे आई थीं और 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पीटल में उसकी मौत हो गई थी, जहां उसे खुसूसी इलाज़ के लिए भेजा गया था। निचली अदालत ने 13 सितंबर, 2013 को मामले के बाकी चार मुल्ज़िमों मुकेश (26), अक्षय ठाकुर (28), पवन गुप्ता (19) और विनय शर्मा (20) को मौत की सजा सुनाई थी और तस्दीक के लिए मामला हाईकोर्ट को सौंपा था।

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