Wednesday , December 13 2017

दिल्ली: जामिया नगर में सफाई अभियान के लिए मुस्लिम महिलाओं ने संभाली परिवर्तन की कमान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के बारे में लोगों के विश्लेषण अलग हो सकते हैं, लेकिन इन दिनों जामिया नगर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र गफ्फार मंजिल में प्रतिबद्ध महिलाओं की बदौलत सफाई के प्रति बदलाव की नई लहर चल रही हैं।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार क्षेत्र में पुरुष प्रभुत्व वाले नाकारा रीज़ीडिंशियल वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) से निराश होकर गफ्फार मंजिल आवासीय क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक गुर्गों और गुंडा तत्वों के खिलाफ कदम आगे बढ़कर सफाई अभियान के प्रति नए बदलाव की कमान अपने हाथों में ले ली है।

परिवर्तन के इस अभियान में भाग लेने वाली महिलायें तहरीमा अहमद, तसनीम जमाल और तरन्नुम अब्दुल्ला कहती हैं कि “क्षेत्र में गंदगी की बदतर स्थिति पर आरडब्ल्यूए द्वारा कार्रवाई का वर्षों तक इंतजार करने के बाद अंततः अपने घरों से बाहर आने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि एक दशक पहले यह स्थान काफी हरा और सुंदर था, जिसे आर डब्ल्यू ए की उदासीनता ने बदतर बना दिया है। ”

इन महिलाओं ने सफाई के प्रति बदलाव की शुरुआत करते हुए गफ्फार मंजिल वीमेन वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया है, जिसे स्थानीय पार्षद इशरत जहां का पूरा समर्थन मिला हुआ है। स्थानीय आर डब्ल्यू ए का चुनाव पिछले कई वर्षों से नहीं हुआ है, जिस वजह से वह निष्क्रिय हो चुकी है और उसके कामकाज पर हमेशा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की खींचतान हावी हो जाती है।

सुश्री तहरीमा अहमद ने कहा कि “क्षेत्र की महिलायें अब जागरूक होने लगी हैं और वह अब गंदगी और मल पर गुंडों के खेल का मूक दर्शक नहीं बन सकती हैं, जिस से क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य को ख़तरा है”। उन्होंने कहा, “हम अपने संसाधनों से कुछ पैसे जमा किए हैं और उनसे फूलों के गमले और कूड़ेदान खरीदकर आसपास की दुकानों और रेस्तरां के सामने रखवाये हैं, ताकि लोग गलियों में गंदगी न फैलाएं”।

तरन्नुम अब्दुल्ला का कहना है कि इस अभियान का सबसे सकारात्मक प्रगति यह है कि इसमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हो रहे हैं, जिन्हें बचपन से ही अपनी रचनात्मकता को परवान चढ़ाने वाले पार्क में कचरे और मल फैला अंबार देखने को मिला है। महिलाओं की एसोसिएशन के एक अन्य सदस्य तसनीम जमाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज के ऐसे रचनात्मक तत्वों का विरोध समाज के वे लोग कर रहे हैं जो सार्वजनिक कल्याण के लिये भी किसी बदलाव के खिलाफ हैं।

हालांकि, स्थानीय पार्षद इशरत जहां कहती हैं कि “यह दुनिया ऐसी है कि जब आप कुछ भी अच्छा काम करना चाहते हैं, तो आप को प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। हमें दृढ़ निश्चय और इरादे के साथ सही संतुष्टि है कि हम सभी रुकावटों को पार करके रहेंगे “।

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