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दिल्ली मर्डर केस: स्वर्गीय अंकित को श्रधांजलि, कातिलो को मिले सजा!

दिल्ली: पश्चिम  दिल्ली के रघुवीर  नगर में रहने वाले अंकित सक्सेना  की 1 फरवरी को जिस लड़की से वो प्रेम करता था उसके घर के पिता और भाई ने गला घोटकर हत्या कर दी गई थी. “अमन की पहल” (एनएपीएम) की ओर से गठित टीम के यूनुस खान, मोहम्मद सलीम और  विमल भाई उनके घर सद्भावना के लिए गए।

टीम ने पाया कि परिवार आर्थिक रूप से बहुत गरीब हैं। उनके लिए 2 जून की रोटी कमाना बहुत मुश्किल काम है। स्वर्गीय अंकित रघुवीर नगर के निम्न आय वर्ग के परिवार से ताल्लुक रखते थे उनके पिता को हृदय की बीमारी है उनकी मां के कई ऑपरेशन हो चुके है।

परिवार ने अपनी इकलौती संतान को खोया है बावजूद इसके वह किसी भी तरीके का कोई भी द्वेष एवं घृणा वाली बात उनके मुंह से नहीं सुनाई दी वह चाहते हैं सभी लोग अमन व शांति से रहें।

अमित और आशीष अंकित के रिश्ते के भाई उनके पिता माता को संभाल रहे हैं और प्रेस आदि से बात कर रहे हैं वह 7 फरवरी की सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी मिलने गए।

वहां की स्थिति ऐसी नहीं थी कि स्वर्गीय अंकित और शहजादी, जिस लड़की से अंकित प्यार करता था, के बारे में बात की जाती। शहजादी अभी दिल्ली के किसी  नारी निकेतन में रह रही हैं। उनको उनके परिवार ने निकाल दिया है।

टीम को अंकित की गली के रहने वालों की यह बहुत खूबसूरत बात लगी की वहां हिन्दू मुसलमान का मुद्दा है ही नही। इस कारण से दिल्ली में सांप्रदायिक आग नहीं लग पाई.

अंकित के परिवार को इस समय उनके अन्य रिश्तेदारों के साथ पडोस में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार संभाल  रहे हैं। जिनका बेटा मज़हर अंकित का दोस्त था। मज़हर  अस्थि प्रवाहित करने भी गया था। एक अन्य सिख लड़का भी चश्मदीद गवाह है।

अमित और आशीष ने बहुत स्पष्ट रूप से प्रेस को बताया कि हमें सिर्फ न्याय मिलना चाहिए और परिवार का इकलौता वारिस क्योंकि अब नहीं है इसलिए परिवार को चलाने के लिए समुचित मुवावजा भी मिलना चाहिए। इसी आशा से वे लोग मुख्यमंत्री के पास गए थे । उनका यह भी कहना है कि अभी तक कई पार्टी के लोग आए सर्वधर्म की बात कहते हुए सिख, हिंदू, मुस्लिम व जैन समाज के संत लोग भी आए। मगर प्रश्न यह है कि इन बूढ़े बीमार लोगों आगे कौन संभालेगा?

यंहा  बात बहुत बिगड़ सकती थी। जो अभी तक सम्भली हुई है। उनको भाजपा , बजरंग दल व शिवसेना के लोग मिले जिन्होंने उनको भड़काने की कोशिश की, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हिंसा में साथ देने के लिए आमंत्रित किया।  किंतु इन लोगों ने पूरी तरह इस बात को नकारा। भाजपा दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी जी ने स्वर्गीय अंकित की माता जी को त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु सहयोग किया इसके अलावा किसी भी किस्म की कोई आर्थिक सहायता यह रिपोर्ट लिखे जाने तक नहीं की है।

यह परिवार वास्तव में बहुत गरीब पर आसपास के लोग भी इस स्थिति में नहीं कि वह इन लोगों को संभाल सके। यह मामला पूरी तरीके से खाप पंचायतो की सोच, दो बालिग युवाओं को स्वतंत्र रूप से प्रेम करने की इजाजत ना देने व पितृसत्तात्मक समाज के मंसूबो को सामने लाता है। हां दबे दबे स्वर में यह भी बात सामने आ रही थी कि जो जाहिर भी है कि यदि यहां कोई भड़काऊ चिंगारी होती तो अंकित को भी तुरंत मोटी रकम का मुआवजा और शहीद का दर्जा देने जैसी  बात तुरंत होती।

हम फिर इस परिवार गली के लोगो और उनके रिश्तेदारों का दिल्ली को सांप्रदायिकता की आग से बचाने का साधुवाद देते हैं। किसी को भी उस गली में  जाकर लोगों से बात करने के बाद हमारी बात से सहमत होना ही पड़ेगा।

पूरे देश को ऐसे महान लोगों की जरूरत है कि जिन्होंने इस दुख की घड़ी में भी अपना संयम बनाए रखो और सिर्फ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाने की मांग की।

हम तमाम जन संगठनों और देश की संविधान प्रदत साम्प्रदायिक एकता को बनाय रखने के लिए काम करने वालो को इसे सिर्फ एक अपराध की तरह ही देखना चाहिए। परिवार व गली के लोगो को संयम और सद्भाव बनाये रखने तथा  सांप्रदायिकता ताकतो  के बहकावे में ना आने के लिए ज़िंदाबाद कहना होगा। वहां जाकर उनका मनोबल भी बनाये रखना होगा। हम समाज से अपील करते हैं कि इसे एक सांप्रदायिक मुद्दा न बनायें और शहजादी को समर्थन दें, जिसने अपने परिवार के खिलाफ खड़े  होने की हिम्मत की और अब अकेली है।

हमारी तीन चिंताएं व मांग है:-

  • यह दिन दहाड़े की गई सुनियोजित हत्या है जिसमें कातिलों को सजा मिलनी चाहिए।
  • परिवार की आगे की जिम्मेदारी जरूर केंद्र व राज्य सरकार को लेनी ही चाहिए।
  • क्योंकि चश्मदीद गवाह युवा हैं और उन्हीं से इलाके में है इसलिए उनकी सुरक्षा साथ ही शहजादी की भी सुरक्षा सरकार को लेनी चाहिए।
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