दिल्ली में थप्पड़ मारने की घटना की तुलना में नौकरशाहों को इससे ज्यादा बुरा सामना करना पड़ा है : अशोक खेमका

दिल्ली में थप्पड़ मारने की घटना की तुलना में नौकरशाहों को इससे ज्यादा बुरा सामना करना पड़ा है : अशोक खेमका

नई दिल्ली : आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का कहना है कि नौकरशाहों ने दिल्ली में थप्पड़ मारने की घटना की तुलना में कहीं ज्यादा बुरा सामना किया है। यह निन्दा था और निंदा की जानी चाहिए, लेकिन पुलिस को अन्य मामलों में भी इसी तरह की उत्सुकता दिखानी चाहिए।

ऐसा कहा जाता है कि नौकरशाह की ईमानदारी और राजनीतिक वर्ग के साथ समझौता करने से इंकार करने के लिए यह देखना पड़ता है कि उनके कैरियर में कितनी बार पोस्ट किया गया है। उस मापदंड से, हरियाणा केडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी अशोक खेमका, अपने 25 वर्षों के सक्रिय सेवा में उन्हें 50 बार पोस्ट किया गया है।

खेमका ट्वीट्स करने की अपनी आदत के बारे में बोलते है, नौकरशाहों के जवाबों पर उनके टिप्पणियों के आरोपों पर आरोप लगाते हैं कि दो विधायकों ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर में थप्पड़ मारा था, सिर्फ यही घटना सबसे बुरी घटना, नौकरशाहों के बीच नहीं है. नौकरशाहों पर राजनेता और कॉर्पोरेट्स हावी हैं, इस पर कोई क्यों नहीं बोलता?

1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की लगभग 25 साल की सेवा का औसत निकाला जाए तो उनका हर छह महीने में तबादला हुआ है. तबादले पर प्रतिक्रिया देते हुए खेमका ने कहा, “एक पीड़ित का जब बार-बार बलात्कार होता है तो वो बलात्कार रूटीन कभी नहीं होता है. 80 बार भी बलात्कार होता है और 81वीं बार भी वो बलात्कार ही होता है.”

खेमका कहते हैं, “मैं महज़ अस्सी दिन इस पद पर था. मेरे तबादले का निश्चित रूप से एक कारण है और वो कारण भ्रष्ट है.” खेमका ने कहा कि सरकार से ये सवाल पूछा जाना चाहिए कि मेरा तबादला प्रशासनिक हित में हुआ है या निजी स्वार्थ में.

खेमका साल 2012 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के ज़मीनी सौदे रद्द करने के बाद चर्चा में आए थे. उस समय हरियाणा में और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी.

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