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दीनी मदारिस , उर्दू मीडियम आली तालीम में रुकावट नहीं

मुंबई, 8 मई: ( एजेंसी ) उर्दू मीडियम या मदरसों की तालीम आली असरी तालीम में रुकावट नहीं बल्कि मददगार होती है जिसकी ताज़ा तरीन मिसाल सिविल सरविस इम्तेहानात में महाराष्ट्रा के शकील महमूद अंसारी की कामयाबी से मिलती है जो एक इंतिहाई पसमा

मुंबई, 8 मई: ( एजेंसी ) उर्दू मीडियम या मदरसों की तालीम आली असरी तालीम में रुकावट नहीं बल्कि मददगार होती है जिसकी ताज़ा तरीन मिसाल सिविल सरविस इम्तेहानात में महाराष्ट्रा के शकील महमूद अंसारी की कामयाबी से मिलती है जो एक इंतिहाई पसमांदा इलाक़ा में रहते हैं और एक ग़रीब ख़ानदान से ताल्लुक़ रखते हैं ।

अंसारी ने इब्तिदाई ( शुरुआती) तालीम उर्दू मीडियम से हासिल की और दीनी मदरसे से उन्होंने अपने तालीमी करीयर का आग़ाज़ किया था लेकिन बचपन से उन्हें सिविल सरविस इम्तेहानात में कामयाबी हासिल करने की ख़ाहिश थी । चुनांचे शकील अंसारी ने अपनी सख़्त मेहनत मुख़लिसाना जुस्तजू और लगन के ज़रीया ज़िंदगी की इस अहम ख़ाब को हक़ीक़त में तब्दील कर लिया । वाज़िह रहे कि सिविल सरविस इम्तेहानात में तक़रीबन 30 मुस्लिम तलबा -ओ- तालिबात कामयाब हुए हैं इनमें शकील अहमद जैसे चंद मुस्लिम लड़के-ओ-लड़कीयां शामिल हैं जिन्होंने पसमांदा इलाक़ों में रहते हुए भी आली तालीमी करियर में कामयाबी का निशाना हासिल किया है ।

शकील अंसारी ने उर्दू दीनी मदरसा से इब्तिदाई तालीम का आग़ाज़ किया और शुमाली महाराष्ट्रा के पसमांदा क़बायली ज़िला ननदोर बार के शहादह टाउन के निशात हाई स्कूल से अपनी तालीम मुकम्मल की विकास हाई और जूनियर कालेज से इंटरमीडीएट किया ।

बादअज़ां उन्होंने पूणे के गारवीर कालेज से फिजिक्स में एम एससी किया । शकील अंसारी ने कहा कि अगरचे उन्होंने सिविल सरविस इम्तेहानात अंग्रेज़ी ज़बान में लिखे थे लेकिन उर्दू ज़बान में इंटरव्यू दिया था। उन्होंने कहा कि उर्दू ज़रीया तालीम या दीनी मुदर्रिसा ,आली तालीम की राह में रुकावट नहीं है बल्कि ये मददगार साबित होते हैं । चुनांचे दीनी मदारिस को असरी तालीम से आरास्ता करने की सूरत में कई तलबा को बेहतरीन असरी तालीम हासिल करने के मौक़े फ़राहम होंगे ।उन्होंने कहा कि हज कमेटी स्टडी सेंटर ने उन की तालीम में मदद की जिसके लिए वो शुक्र गुज़ार है ।

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