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दीन इस्लाम, आलमी अमन का ज़ामिन

में ये तस्लीम करता हूँ कि इस्लाम और इस के रसूल के बारे में मेरे नज्रियात रिसाला इस्लामिक रिव्यू ने यकसर तब्दील कर दिए हें। चंद माह क़ब्ल मेरा ख़्याल था कि नबी करीम स.व.

में ये तस्लीम करता हूँ कि इस्लाम और इस के रसूल के बारे में मेरे नज्रियात रिसाला इस्लामिक रिव्यू ने यकसर तब्दील कर दिए हें। चंद माह क़ब्ल मेरा ख़्याल था कि नबी करीम स.व. ने तल्वार के जोर से तब्लीग़ दीन की और गु़लामी की वकालत की, मगर अल्लाह का शुक्र हें कि अब मुझे हक़ नज़र आगया हें। अब मुझे पुख़्ता यक़ीन हें कि दुनिया में अमन की वाहिद ज़मानत हज़रत मुहम्मद स.व. का सच्चा दीन हें। (टी यू डीनल, ग़नीट। बेल्जियम)

मुझे क़ुरान की बलीग़ ज़बान मुतास्सिर करती हें
मुझे अपने क़बूल इस्लाम के बारे में लिख कर बहुत ख़ुशी महसूस हो रही हें। में अपनी इबतिदाई उम्र में भी अक़ीदा-ए-तस्लीस के मुताल्लिक़ तअम्मुल‌ में था। में ये नहीं समझ सकता था कि अल्लाह ताला इस ज़मीन पर (आम इंसानों की तरह) बेटा पैदा कर सकता हें। में रब ताला को हमेशा दस्तरस से बाहर और क़ादिर ‍ ए‍ मुत्लक़ समझता था। मुझे ईसाईयत के तमाम अन्बिया से मुहब्बत हें और उन का एहतिराम भी करता हूँ, क्योंकि उन्हों ने मुश्किलात में साबित क़दम रह कर अपने अपने इलाक़ों में दीन हक़ की तब्लीग़ की।

मुझे एक अजीब सी बेचैनी महसूस होती थी और इस की वजह से मेरे मुआमलात ना सुधर सके।
अब मैंने तक़रीबन निस्फ़ सूरत अल बक़रा पढ़ ली है। इस कलाम मुक़द्दस में जो बात मुझे बहुत ज़्यादा मुतास्सिर करती हें, वो उस की बलाग़त लिसानी और अल्लाह की अज़मत का सबूत हें, जिसे क़ुरान-ए-करीम बार बार पेश करता है। (दाउद कोवान। डंडी। स्काट लैंड, बर्तानिया)

क़ुरान बिलाशुबा वही इलाही हें
क़ुरान हकीम बिलाशुबा अल्लाह ताला की तरफ़ से इंसान की हिदायत के लिए नाज़िल किया गया। (डेविड (उम्र) निकल्सन)
मुसल्मान होना रोए ज़मीन पर सब से बड़ी नेअमत है
मैं हमेशा मस्जिद में नमाज़ के औक़ात में आने वालों के ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू से मुतास्सिर हुआ, जो कि मेरे ईसाईयत के साबिक़ तजुर्बे से बहुत मुख़्तलिफ़ था। इस्लाम के बारे में किताबों के मुताला और पुरानी किताबों की एक दूकान से क़ुरान हकीम का अंग्रेज़ी तर्जुमा ख़रीद कर पढ़ने के बाद में इस नतीजा पर पहुंचा कि मुसल्मान होना नेमत अजिम‌ हें, जिस की ख़ाहिश इंसान रोए ज़मीन पर कर सकता हें। इस्लाम का अक़ीदा वुसअत ज़र्फ़ का हामिल, साफ़ सुथरा और ख़ालिस मिन जानिब अल्लाह हें, वर्ना इस्लाम इस तरह आसानी से फ़रोग़ ना पाता। क़ुरान हकीम का जो तर्जुमा मेरे पास हें, वो इज़्ज़त मआब जय एम राडोल ने किया हें। मेरे ख़्याल में तर्जुमा तो दरुस्त हें, मगर सूरतों को ख़लत-मलत कर दिया गया हें और बारीक लिखाई में मुतर्जिम के वज़ाहती ब्यानात से तंगनज़री और हमारे नबी अकरम स.व. के ख़िलाफ़ तास्सुब झलकता हें। (एर्न्स्ट जय ब्रूमले। पोर्ट सी, पोर्टस , बर्तानिया) (इस्लामिक रिव्यू, जनवरी। फरवरी १९३३य-ए-

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