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दीवाली के अहम मौक़ा पर सरकारी मुलाज़मीन तनख़्वाहों और एलाउंस से महरूम

भोपाल, १३ नवंबर (पीटीआई) मध्य प्रदेश में अपोज़ीशन कांग्रेस ने रियास्ती बी जे पी हुकूमत को शदीद तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि हुकूमत की बेहिसी ( सुन्न) आख़िर किस बात पर है?

भोपाल, १३ नवंबर (पीटीआई) मध्य प्रदेश में अपोज़ीशन कांग्रेस ने रियास्ती बी जे पी हुकूमत को शदीद तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि हुकूमत की बेहिसी ( सुन्न) आख़िर किस बात पर है? रियास्ती मुलाज़मीन को तनख़्वाहों और एलाउंस की अदायगी में ताख़ीर (देरी) आख़िर क्या मायने रखती है।

धनतेरस तो चला गया और अब दीवाली है। रियास्ती वज़ीर-ए-आला शिवराज सिंह चौहान की वजह से कई मुलाज़मीन दीवाली जैसा अहम त्योहार मनाने के मौक़िफ़ में नहीं हैं। त्योहार मनाने के लिए पैसों की ज़रूरत होती है। कपड़ों, पकवान और पटाख़ों के लिए ज़ाइद रक़ूमात एलाउंला की अदायगी के बाद ही मुलाज़मीन के हिस्से में आती है जिस से वो ख़रीदारी वग़ैरा करते हैं।

एम पी असेंबली में क़ाइद अपोज़ीशन अजय सिंह ने कहा कि वज़ीर-ए-आला को अपनी रियाया का दुख दर्द समझना चाहीए। ख़ुसूसी तौर पर दीवाली जैसे अहम त्योहार पर ऐसी बेहिसी दिखाना मुनासिब नहीं। अपनी बात जारी रखते हुए उन्हों ने कहा कि ट्रांसपोर्ट, हैल्थ और इंजीनीयरिंग महकमाजात के मुलाज़मीन अपनी तनख़्वाहों और एलाउंस से महरूम हैं जबकि वज़ीर-ए-आला ने अपने दफ़्तर में धनतेरस मनाया और शॉपिंग भी की।

उन्हों ने कहा कि एक ऐसे वक़्त जबकि हुकूमत ने इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मेट पर करोड़ों रुपय ख़र्च किए लिहाज़ा हुकूमत का ये इस्तिदलाल पेश करना कि मुलाज़मीन को अदा करने के लिए सरकारी खज़ाने में रक़ूमात नहीं हैं, इंतिहाई ग़ैर मुनासिब है। उन्होंने कहा कि आम दिनों की बात जुदा है लेकिन अहम तहवारों जैसे दशहरा और दीवाली के मौक़ों पर अवाम की तवक़्क़ुआत और ज़रूरीयात में इज़ाफ़ा हो जाता है और अर्बाब इक़तिदार ( शासन) का ये फ़र्ज़ बन जाता है कि वो उन की तवक़्क़ुआत पर पूरे उतरें।

सब दिन चंगे , त्योहार के दिन नंगे वाली बात यहां सादिक़ आती है।

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