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दुष्कर्म के मामलों में दोषियों को फांसी की सजा, विधेयक का मसौदा तैयार

भोपाल : दस साल से कम उम्र की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में अब फांसी की सजा तक सुनाई जा सकेगी। सूत्रों के मुताबिक दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए शिवराज सरकार ने कड़ा कानून बनाने की फैसला किया है। राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में दंड विधि में संशोधन विधेयक लाएगी। इसका मसौदा मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।

विधि विशेषज्ञों सहित अन्य सभी पक्षों से चर्चा के बाद विधि एवं विधायी विभाग के मसौदे को वरिष्ठ सचिव समिति मंजूरी दे चुकी है। विधि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दस साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में 14 साल और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा होगी। अधिकतम सजा फांसी तक दी जा सकेगी।
आजीवन सजा 14 साल नहीं बल्कि पूरी जिंदगी होगी। सार्वजनिक स्थानों पर महिला की बेइज्जती करने, छेड़खानी, पीछा करने, फब्तियां कसने व अभद्र इशारा करने जैसे मामलों में भी सजा सख्त होगी।

धारा 354 ए, 354बी, 354सी, 354डी में जमानत देने से पहले अदालत लोक अभियोजक का पक्ष जरूर सुनेगी। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि संशोधन पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

शादी का झांसा देकर किसी भी महिला पार्टनर के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रहना भारी पड़ सकता है। महिला पार्टनर यदि पुलिस थाने में सेक्सुअल हरेसमेंट की कम्पलेंट करती है तो इसमें 7 साल तक की सजा हो सकती है। इसके भारतीय दंड संहिता (आइपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता(सीआरपीसी) की धाराओं में बदलाव कर 493 ए नई धारा प्रस्तावित की गई है।

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